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कोहरे की मार से सरसों की फसल पर संकट

प्रकाशित: 05 Jan 2026

कोहरे की मार से सरसों की फसल पर संकट, फूल झड़ने से घटेगी पैदावार
बांदा। जनवरी माह की शीतलहर के साथ छाए घने कोहरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जनपद में खेतों में लहलहा रही सरसों की फसल पर मौसम की मार साफ दिखाई देने लगी है। कोहरे के चलते सरसों के फूल झड़ने लगे हैं, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ना तय माना जा रहा है। जिले में करीब 15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई गई सरसों की फसल पर माहू रोग का खतरा भी मंडरा रहा है, वहीं चना, मटर और गेहूं की फसलों में पाला पड़ने की आशंका से किसान परेशान हैं।
जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों में फसलों को विशेष सावधानी की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि सरसों की फसल में माहू रोग से बचाव के लिए कर्बंडाजेम-75 दवा का छिड़काव करें। एक एकड़ खेत के लिए 300 लीटर पानी में दवा मिलाई जाए, जबकि एक लीटर पानी में दो ग्राम दवा की मात्रा उपयुक्त रहेगी। उन्होंने कहा कि दवा का छिड़काव पौधों पर ऊपर से नीचे तक किया जाए, ताकि कीट का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो सके।
कृषि अधिकारी ने बताया कि कोहरे के कारण चना, मटर और गेहूं की फसलों में भी पाले का असर पड़ सकता है। पाले से फसलों की पत्तियां झुलसने लगती हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है। इससे बचाव के लिए किसानों को शाम के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही खेतों के चारों कोनों में घास-फूस जलाकर हल्का धुआं करने से तापमान में संतुलन बना रहता है और फसल को पाले से राहत मिलती है।
मौसम एवं कृषि वैज्ञानिक दिनेश शाहा ने बताया कि ठंड और कोहरे के कारण सरसों के साथ-साथ आलू, अरहर और मटर की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने किसानों को समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव करने, नियमित निगरानी रखने और धुआं विधि अपनाने की सलाह दी है, ताकि फसलों को पाले और झुलसा रोग से बचाया जा सके।
जिला कृषि अधिकारी ने दावा किया कि 15 जनवरी के बाद मौसम के सामान्य होने की संभावना है। तब तक किसानों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार समय पर दवा और सिंचाई कर अपनी फसलों को सुरक्षित रखें।