लगातार बारिश से उफनी नदियों ने बढ़ाया खतरा
चिल्ला (बांदा)।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की पैलानी तहसील में शुक्रवार को यमुना, केन और चंद्रावल नदियों ने मिलकर रौद्र रूप दिखाया। लगातार हो रही बारिश के चलते इन नदियों का जलस्तर खतरनाक सीमा को पार कर गया है, जिससे तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में घरों और खेतों में पानी भर गया है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुट गए हैं। लोग अपने जानवरों और सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अधिकतर लोग गढ़ी टीला की ओर शरण ले रहे हैं।
प्रशासन की सतर्कता:
जिलाधिकारी ने बताया कि यमुना का जलस्तर डेंजर जोन 99 मीटर को पार करते हुए 102.30 मीटर तक पहुंच गया है। यह खतरे के निशान से 3.30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप:
बाढ़ से प्रभावित गांवों में ट्रांसफॉर्मर फुंक गए हैं, जिससे बिजली, पीने का पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं ठप हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार लोगों के लिए इलाज तक की सुविधा नहीं मिल रही है।
गौरीकला और गड़रिया की स्थिति भयावह:
गौरीकला का रपटा पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जहां सड़क पर 6 फीट पानी बह रहा है और नाव के जरिए ही आना-जाना संभव हो पाया है। वहीं गड़रिया गांव में पानी की ऊंचाई 12 फीट तक पहुंच गई है।
जसपुरा और तरौड़ा टापू जैसे हालात:
जसपुरा कस्बे का स्टेडियम तक पानी में डूब चुका है, वहीं जसपुरा का मजरा तरौड़ा चारों ओर से पानी में घिर चुका है। सड़क पर करीब 12 फीट पानी भरा हुआ है जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है।
चिल्ला में खतरे की घंटी:
थाना प्रभारी संदीप तिवारी ने बताया कि चिल्ला थाना क्षेत्र के गांवों जैसे खजूरी, तारा, लौमर, सादीमदनपुर और चिल्ला में यमुना व केन नदियों के जलस्तर में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। बांदा-चिल्ला और चिल्ला-ललौली मार्ग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। चिल्ला पुल के पास सादीमदनपुर चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर लोगों को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है, क्योंकि पुल की कोठी डूबने के कगार पर है।
चिल्ला बाजार में भी यमुना-केन नदी का पानी प्रवेश कर चुका है, जिससे स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं।