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भक्ति के संगम के बीच श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन

प्रकाशित: 09 Apr 2026

जहांगीराबाद। नगर में श्रद्धा और भक्ति के संगम के बीच श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन हुआ। समापन दिवस पर वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथा व्यास आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म, संस्कार और जीवन की सार्थकता का बोध कराया।
​गुरु तत्त्व और प्रकृति से सीख
​अपने ओजस्वी संबोधन में आचार्य कौशिक ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरु मात्र एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह दिव्य तत्त्व है जो अज्ञानता को मिटाकर ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ​पृथ्वी: हमें सहनशीलता सिखाती है। ​जल: जीवन में पवित्रता का संचार करता है। ​सूर्य: निरंतर कर्मशीलता की प्रेरणा देता है। ​महाराज जी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सनातन धर्म की रक्षा केवल बाहरी प्रदर्शन या नारों से नहीं, बल्कि स्वयं के आचरण से होगी। उन्होंने भारतीय जीवनशैली को पूर्णतः वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा निर्धारित व्रत और उपवास के नियम शरीर और मन के संतुलन के लिए अनिवार्य हैं। ​​कथा के विश्राम अवसर पर आचार्य जी ने समाज के कल्याण हेतु तीन महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए जैसे- गंगा जैसी निर्मलता: मन के विचारों में शुद्धता रखें। ​गायत्री जैसी बुद्धि: विवेकपूर्ण निर्णय लें। ​गुरु का मार्गदर्शन: जीवन की दिशा के लिए गुरु पर अटूट विश्वास। ​कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति द्वारा आचार्य जी का भव्य सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर आरती में भाग लिया और आशीर्वाद प्राप्त किया। ​इस अवसर पर मुख्य रूप से शिवा विजय, उमेश विजय, पूनम बंसल, शकुंतला गोयल, गौरव बंसल, भारत गोयल, अजय कौशिक (पत्रकार), उमेश वार्ष्णेय, सूर्य प्रकाश बंसल, योगेश कंसल, भोलू, सौरव विरदी, एवं कृष्णकांत वार्ष्णेय सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा वातावरण "राधे-राधे" के जयकारों से गुंजायमान रहा।

​"यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन और सदाचार को अपना ले, तो समाज स्वतः ही सशक्त और संगठित हो जाएगा।"

आचार्य मनीष कौशिक