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कड़ाके की ठंड और शीतलहर में अलाव बना आमजन का सहारा

प्रकाशित: 08 Jan 2026

7 जनवरी 2026

जहांगीराबाद। ​उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड और पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। न्यूनतम तापमान में लगातार आ रही गिरावट और सुबह-शाम की शीतलहर के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ऐसे में ठिठुरन भरी इस सर्दी से बचने के लिए अब अलाव ही लोगों का सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है। ​शहर हो या गाँव सुबह से शाम ढलते ही सार्वजनिक स्थानों, बस अड्डों और नुक्कड़ों पर अलाव जलते देखे जा सकते हैं। लोग लकड़ियाँ, पुराने टायर और गत्ते इकट्ठा कर आग जला रहे हैं, ताकि शरीर को कुछ गर्माहट मिल सके। कड़ाके की इस ठंड में सबसे ज्यादा परेशानी उन दिहाड़ी मजदूरों और रिक्शा चालकों को हो रही है, जिन्हें पेट भरने के लिए कड़ाके की ठंड में भी बाहर निकलना पड़ रहा है। उनके लिए फुटपाथ पर जलता अलाव ही एकमात्र राहत है। अलाव केवल गर्मी का स्रोत नहीं, बल्कि चर्चा का केंद्र भी बन गया है। ग्रामीण इलाकों में अलाव के चारों ओर बैठकर लोग राजनीति से लेकर खेती-बाड़ी तक की बातें साझा कर रहे हैं।

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

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​डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण हृदय और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है जैसे - ​अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। ​शरीर को पूरी तरह ऊनी कपड़ों से ढंक कर रखें। ​अलाव के पास बैठते समय सावधानी बरतें और बंद कमरे में अंगीठी जलाकर न सोएं, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकती है।