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आज मनेगी मकर संक्रांति, तिथि को लेकर आचार्यों ने किया भ्रम दूर

प्रकाशित: 14 Jan 2026

जहांगीराबाद। मकर संक्रांति पर इस वर्ष 22 वर्षों बाद एकादशी का दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ने से इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण शास्त्रों में आज 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाना शास्त्रसम्मत बताया गया है। आचार्य नरेंद्र शर्मा, हरिकिशन शास्त्री और अनुराग शर्मा ने बताया कि आज 14 जनवरी को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य का उत्तरायण प्रारंभ होगा, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इसलिए इस वर्ष मकर संक्रांति आज ही मनाई जाएगी। आचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किए गए धार्मिक कर्म विशेष फलदायी होते हैं। एकादशी का संयोग होने के कारण श्रद्धालुओं को शास्त्रों के अनुसार संयम और नियमों का पालन करते हुए पर्व मनाने की सलाह दी गई है।

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बदल रही तिथि, 15 को खिचड़ी मनाना उचित

आचार्यों ने बताया कि मकर संक्रांति को लेकर तिथि परिवर्तन के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। आचार्य नरेंद्र शर्मा और हरिकिशन शास्त्री के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर बाद सूर्य संक्रमण होने से उस दिन उदया तिथि नहीं मिल पा रही है। ऐसे में खिचड़ी का दान और प्रसाद वितरण 15 जनवरी को करना अधिक उचित रहेगा।
आचार्य अनुराग शर्मा ने बताया कि जिन श्रद्धालुओं के यहां एकादशी व्रत और पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है, वे खिचड़ी का आयोजन 15 जनवरी को कर सकते हैं, जबकि संक्रांति पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा।


मकर संक्रांति पर दान-स्नान का विशेष महत्व
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आचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल और गुड़ चावल और उड़द खिचड़ी कंबल व वस्त्र का दान अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।