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दिल्ली में हवा ज़हरीली, कदम नाकाफी

प्रकाशित: 26 Nov 2025

दिल्ली में हवा लगातार ज़हरीली होती जा रही है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंध और आदेश प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। GRAP स्टेज-III लागू होने के बाद सरकारी और निजी कार्यालयों में 50% स्टाफ सीमा, वर्क फ्रॉम होम, स्टैगर्ड टाइमिंग्स जैसे निर्देश जारी किए गए, पर विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम “कागज़ी” साबित हो रहे हैं और ज़मीनी स्तर पर इनका असर नगण्य है।

प्रदूषण का स्तर बीते कई हफ्तों से गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर लगातार खतरनाक स्तर पार कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद न तो निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक दिख रही है, न सड़कों पर धूल नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था नज़र आती है। निजी वाहनों की संख्या पर भी कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। दिल्ली की जनता का कहना है कि सरकार हर साल वही पुराने आदेश जारी करके अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेती है, लेकिन असली काम नहीं होता।

पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण के असली स्रोत — जैसे वाहन धुआं, सड़क धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, NCR में पराली जलाना और निर्माण गतिविधियां — पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिखती। 50% स्टाफ कैप जैसे कदम सिर्फ अस्थायी राहत देते हैं, जबकि समस्या की जड़ें कहीं गहरी हैं।
कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भी यह सवाल उठाया है कि “क्या सिर्फ दफ्तर बंद करने से दिल्ली की हवा साफ़ हो जाएगी?”, जबकि ट्रकों की आवाजाही, थर्मल प्लांटों का उत्सर्जन और बड़े उद्योगों पर कोई कड़े कदम नज़र नहीं आते।

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच भी जिम्मेदारी को लेकर टकराव देखने को मिलता है। दोनों एक-दूसरे पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाते हैं, लेकिन राजधानी का आम नागरिक हर साल ज़हरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होता है। लोगों का कहना है कि सरकारें सिर्फ मीटिंग करती हैं, आदेश जारी करती हैं, लेकिन जमीन पर न तो मॉनिटरिंग होती है और न ही कड़ाई।

विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि अगर प्रदूषण नियंत्रण में गंभीरता होती, तो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाता, औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त निगरानी होती, और NCR में पराली प्रबंधन के लिए प्रभावी योजना लागू की जाती।

लेकिन मौजूदा हालात में यह साफ़ है कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर जो भी कार्रवाई हो रही है, वह नाकाफी है।
जनता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “सरकार मुकाबले में नहीं, सिर्फ दिखावे में लगी है।”

दिल्ली की हवा साँसों पर लगातार हमला करती जा रही है, और लोगों का विश्वास है—अगर सरकारें इसी तरह ढुलमुल रवैया अपनाती रहीं, तो हालात और बदतर होंगे।