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पहाड़ी परी को पूर्ण न्याय कब : नाबालिग के अपहरण और शोषण के खिलाफ प्रवासी समाज की आवाज़

दिल्ली | 19-Nov-2025 03:50 AM | 11 |
दिल्ली
नाबालिग के अपहरण और शोषण के खिलाफ प्रवासी समाज की आवाज़

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025

राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र के बलजीत नगर इलाके में नाबालिग पहाड़ी परी के अपहरण और दुष्कर्म का मामला अब जनआक्रोश का रूप ले चुका है।
स्थानीय नागरिकों और उत्तराखण्ड प्रवासी समाज ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर अपराध में न केवल 11 दिन की देरी की, बल्कि शुरुआत से ही मामले को हल्के में लिया।

रिपोर्ट दर्ज करने में 11 दिन की देरी

परिजनों के अनुसार, बच्ची के लापता होने की सूचना 6 अक्टूबर को थाने में दी गई थी, परंतु एफआईआर 17 अक्टूबर को जाकर दर्ज की गई।
परिवार के बार-बार निवेदन के बावजूद पुलिस ने “जांच जारी है” कहकर मामला टाल दिया।
इस दौरान परिजन निराश होकर स्वयं खोजबीन करते रहे, पर उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।

MDUPS संगठन की पहल

स्थिति गंभीर होती देख महानगर दिल्ली उत्तराखण्ड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी अपने सदस्यों के साथ थाने पहुंचे।
विरोध और दबाव के बाद 18 अक्टूबर को आखिरकार एफआईआर दर्ज हुई।
संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 24 अक्टूबर तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया था, जबकि स्वयंसेवकों ने बच्ची की लोकेशन का पता लगाकर पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद पीड़िता बरामद हुई।

मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि

मेडिकल जांच में नाबालिग के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई।
इसके बावजूद पुलिस ने अब तक धारा 164 के अंतर्गत न्यायिक बयान दर्ज नहीं करवाए।
मामले की सुनवाई “अगले मंगलवार” तक टल जाने से लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।

धरना, प्रदर्शन और गिरफ्तारी

प्यारे फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंजलि थपलियाल कौल, सामाजिक कार्यकर्ता रेखा हिन्दू देवी, आस्था माँ सुदर्शन चक्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद सिंह, और (MDUPS) संस्था के कमल ध्यानी के नेतृत्व में थाना परिसर के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया।
लगातार दबाव और सोशल मीडिया अभियान के बाद पुलिस ने 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें 2 मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये लोग नाबालिग को बहला-फुसलाकर 9 दिनों तक एक किराए के मकान में रखते थे, जहाँ उसके साथ कई बार दुष्कर्म हुआ। तीन आरोपी बालिक खास समुदाय के अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

“यह केवल अपराध नहीं, समाज की चेतना की पराजय है” — डॉ. अंजलि थपलियाल कौल

“जब मैंने उस नाबालिग बच्ची की हालत और उसके पिता का दर्द देखा, तो लगा कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक चेतना की पराजय है।

आज की पीढ़ी में सोशल मीडिया की विकृत संस्कृति बच्चों की मासूमियत को निगल रही है।
अब समय है कि हम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और करुणा की ओर लौटें — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रह सकें।”

 

“पूर्ण न्याय नहीं तो आंदोलन होगा” — कमल ध्यानी

“हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती।
यदि न्याय में देरी हुई तो प्रवासी समाज राजधानी की सड़कों पर फिरसे उतरेगा।”

मीडिया से अपील

इस सम्बन्ध मे जुड़े सभी संगठन ने स्वतंत्र और राष्ट्रहित पत्रकारों से अपील की है कि वे इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाएँ, ताकि जनता को यह पता चल सके कि कैसे राजधानी में भी एक नाबालिग बच्ची के लिए न्याय पाने की लड़ाई समाज को खुद लड़नी पड़ रही है।

पहाड़ी परी की न्याय की लड़ाई अब सड़कों पर लड़ी

बलजीत नगर का यह मामला केवल एक नाबालिग के साथ हुए अत्याचार का नहीं, बल्कि तंत्र की निष्क्रियता का प्रतीक बन गया है।
अब सवाल यह है —

* क्या दिल्ली में भी न्याय पाने के लिए संगठनों को फिर से धरना देना पड़ेगा?

•क्या पुलिस की संवेदनशीलता अब केवल जनदबाव से जागती है?

जब व्यवस्था मौन हो, तो समाज को आवाज़ उठानी ही पड़ती है — और साची बिस्ट का मामला उसी जागरण का प्रतीक है।

लेखक: रविंद्र आर्य
(भारतीय लोकसंस्कृति, समाज और सुरक्षा विषयों पर खोजपरक पत्रकारिता से जुड़े लेखक)

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