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राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला

प्रकाशित: 29 Oct 2025

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025

राजधानी दिल्ली के पटेल नगर थाना क्षेत्र के बलजीत नगर इलाके में नाबालिग साची बिस्ट के अपहरण और दुष्कर्म का मामला अब सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। परिवारजन का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में 11 दिन की देरी की और शुरुआती दौर में मामले को दबाने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट दर्ज करने में 11 दिन की देरी

पीड़िता 6 अक्टूबर से लापता थी, लेकिन थाने में एफआईआर 17 अक्टूबर को दर्ज हुई। इस दौरान परिवारजन पुलिस से बार-बार गुहार लगाते रहे, मगर जवाब मिला — “जांच चल रही है।”

MDUPS संगठन ने संभाली कमान

परिजनों की मदद को आगे आए महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी, जिन्होंने थाने में प्रदर्शन कर पुलिस को कार्रवाई के लिए विवश किया। भारी दबाव के बाद 18 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज की गई।

पुलिस की निष्क्रियता पर तीखा विरोध

24 अक्टूबर तक भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। MDUPS स्वयंसेवकों ने अपने स्तर पर साची की लोकेशन ट्रेस की और पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद लड़की बरामद हुई। मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि के बावजूद धारा 164 के तहत बयान नहीं करवाए गए।

समाज और मीडिया की भूमिका

कमल ध्यानी ने मीडिया से अपील की है कि “यह मामला सिर्फ एक बच्ची का नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता का आईना है।”
डॉ. अंजलि थपलियाल कौल, दिल्ली के प्यारे फाउंडेशन की अध्यक्ष, ने कहा —

“साची बिस्ट जैसी घटनाएँ हमारी सामाजिक चेतना की असफलता हैं। अब वक्त है कि हम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिकता की ओर लौटें।”

उठते सवाल

क्या न्याय पाने के लिए नागरिकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा?
क्या पुलिस तभी जागती है जब जनता गुस्से में होती है?

बलजीत नगर की यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि प्रणाली की संवेदनहीनता पर करारा तमाचा है।
समाज अब एक स्वर में कह रहा है —
“नाबालिग को न्याय दो, दोषियों को सजा दो!”