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भाजपा और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप

प्रकाशित: 08 Aug 2025
भाजपा और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप: वोटर लिस्ट में घोटाले का दावा, कहा– "हम छोड़ेंगे नहीं"

 

नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत में फर्जी वोटिंग बड़े पैमाने पर हो रही है, और यह सब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर किया जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे “वोटों की खुली लूट” करार दिया।

राहुल गांधी ने कहा, “एग्जिट पोल और नतीजों के बीच फर्क साफ दिख रहा है। इससे न सिर्फ आम नागरिक बल्कि राजनीतिक दल भी भ्रमित हैं।”

राहुल गांधी का ‘एटम बम’: चुनाव आयोग पर पांच बड़े आरोप

राहुल गांधी ने पहले ही घोषणा की थी कि उनके पास चुनाव आयोग के खिलाफ एक "एटम बम" है। प्रेस वार्ता में उन्होंने इन तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए कहा कि कांग्रेस की 6 महीने लंबी जांच में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी उजागर हुई है।

वोट चोरी के पांच तरीके, राहुल का दावा:
  1. डुप्लीकेट वोटर्स – 11,965

  2. फर्जी/अमान्य पते – 40,009

  3. एक ही पते पर बल्क वोटर रजिस्ट्रेशन – 10,452

  4. अवैध फोटो आईडी – 4,132

  5. फॉर्म-6 का दुरुपयोग – 30,000

महादेवपुरा सीट से खुला घोटाले का राज

राहुल गांधी ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस की हार के बाद जांच शुरू की गई। "इस सीट पर हम 32,707 वोट से हारे, जबकि भाजपा को भारी बढ़त मिली। जब हमने पड़ताल की तो पता चला कि इस सीट पर 1 लाख से अधिक डुप्लीकेट या फर्जी वोटर हैं।"

उन्होंने बताया कि कुछ घरों में 80 से ज्यादा वोटर पंजीकृत थे, जबकि हजारों मकानों का पता ‘शून्य’ दर्शाया गया। “यह एक राज्य की बात नहीं, देशभर में संगठित रूप से वोटर लिस्ट में हेराफेरी हो रही है।”

चुनाव आयोग से राहुल गांधी के सवाल:
  • क्या देश की वोटर लिस्ट पारदर्शी और प्रमाणिक है?

  • आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा साझा क्यों नहीं करता?

  • फर्जी वोटर्स और डुप्लीकेट एंट्री पर क्यों चुप्पी?

राहुल ने कहा, “हमने बार-बार डेटा मांगा, लेकिन चुनाव आयोग ने न तो जवाब दिया, न ही डेटा साझा किया। क्या आयोग किसी से डर रहा है?”

चुनाव आयोग को चेतावनी

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को सीधे शब्दों में चेताया—“चाहे आप जूनियर हों या सीनियर अधिकारी, हम आपको नहीं छोड़ेंगे। यह लोकतंत्र की नींव के साथ खिलवाड़ है। जनता को जवाब चाहिए।”

यह मुद्दा सिर्फ चुनावी नहीं, लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। कांग्रेस ने अब यह डेटा सार्वजनिक करने का फैसला किया है। आने वाले समय में यह मामला देशभर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकता है।