कौशाम्बी न्यूज़
रिपोर्ट,तालिब सिद्दीकी जिला ब्यूरो चीफ phm news
कौशांबी।
जिले के मंझनपुर इलाके से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। हजरतगंज मोहल्ले में नगर पालिका की घोर लापरवाही के चलते एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। मोहल्ले में लंबे समय से खुला पड़ा नाला प्रशासन की अनदेखी का प्रतीक बन गया था, जो अब एक मासूम की कब्र में बदल गया।
⚠️ घटना का विवरण
स्थान: हजरतगंज मोहल्ला, मंझनपुर, कौशांबी
घटना: खुला और गहरा नाला जो महीनों से ढका नहीं गया था
पीड़ित: एक मासूम बच्ची (परिवार के अनुसार नाम और उम्र अपडेट की जाएगी)
परिणाम: नाले में गिरने से बच्ची की मौके पर ही दर्दनाक मौत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची मोहल्ले के पास खेल रही थी जब अचानक पैर फिसलने से वह खुले नाले में गिर गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाने की कोशिश की, लेकिन गंदे और गहरे पानी के कारण बच्ची को नहीं बचाया जा सका।
🚨 नगर पालिका की बड़ी लापरवाही
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस नाले की शिकायत कई बार नगर पालिका परिषद मंझनपुर से की गई थी। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने इसे “प्रशासनिक हत्या” बताया है।
> “यह मौत नहीं, प्रशासनिक लापरवाही की सजा है,” – एक स्थानीय निवासी ने कहा।
“अगर पालिका ने समय रहते नाला ढक दिया होता, तो आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।”
😡 स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद पूरे मोहल्ले में शोक और गुस्से का माहौल है। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की है।
हम जिला प्रशासन और नगर पालिका से निम्न कदमों की तत्काल मांग करता है:
1. उच्च स्तरीय जांच: घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
2. मुआवजा: मृतक बच्ची के परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
3. सुरक्षा उपाय: मंझनपुर नगर पालिका क्षेत्र के सभी खुले और खतरनाक नालों को तत्काल ढकने की कार्रवाई की जाए।
🧍 परिजनों का दर्द
बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता ने कहा —
> “हमने कई बार शिकायत की थी, लेकिन किसी ने सुना नहीं। अब हमारी बेटी चली गई, कौन जिम्मेदार है?”
🔹 प्रशासन की जिम्मेदारी
यह हादसा नगर निकायों की लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। हर साल इस तरह की घटनाएं नगर निकायों के लचर सिस्टम पर सवाल उठाती हैं। अब देखना होगा कि कौशांबी प्रशासन इस घटना पर क्या ठोस कदम उठाता है।
स्थान: हजरतगंज मोहल्ला, मंझनपुर, कौशांबी
🧭 निष्कर्ष
यह हादसा सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का सबूत है। जब तक जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से नहीं डरेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं यूँ ही मासूमों की जान लेती रहेंगी।