दारू ठेका बंद कराने पर बवाल
रिपोर्ट: रविंद्र आर्य
समाचार रिपोर्ट (मथुरा–वृंदावन)
मथुरा–वृंदावन में ब्रज को मांस-मदिरा मुक्त बनाने की चल रही मुहिम के बीच मंगलवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गौ-रक्षक और युवा सनातनी कार्यकर्ता दक्ष चौधरी तथा वृंदावन कोतवाली के एक दरोगा के बीच हुई तीखी बहस का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वायरल कॉल में दोनों पक्ष देशी भाषा में एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुने जा सकते हैं, जिसमें रंगदारी साबित ना हुई तो ‘वर्दी उतरवा दूँगा’ जैसे शब्द भी शामिल हैं।
ब्रजवासी अपमान का आरोप—दक्ष चौधरी ने कहा: “माफी मांगो”
दक्ष चौधरी का आरोप है कि विवाद के दौरान दरोगा के साथ-साथ कुछ स्थानीय लोगों ने भी ब्रजवासियों को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे, जिसके बाद उन्होंने साफ कहा—
“ब्रज के लोगों से अपशब्द कहने वालों को माफी माँगनी चाहिए।”
दक्ष का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप—विशेषकर ₹5 लाख रंगदारी का—पूरी तरह झूठे और तथ्यहीन हैं।
ब्रज को ‘मांस-मदिरा मुक्त’ बनाने का अभियान और इसका प्रभाव
धीरेन्द्र शास्त्री की यात्रा और पूज्य गुरुओं के आह्वान के बाद ब्रज में मांस-मदिरा मुक्त ब्रज की मुहिम तेज़ हुई है। इस मुहिम का असर यह है कि:
* स्थानीय युवा ओर बहारी सनातनी कार्यकर्त्ता ठेकों का विरोध कर रहे हैं
* कई जगह लोग खुद शटर गिरवाने की मांग कर रहे हैं
* अख़बारों में लगातार सुर्खियाँ बन रही हैं
* दक्ष की गौ-रक्षक टीम भी इसी मुहिम में सक्रिय बताई जाती है।
विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?
विवाद वात्सल्य ग्राम, वृंदावन के पास स्थित एक दारू के ठेके को लेकर शुरू हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ठेके के पास:
आये दिन चोरी, मारपीट, लूटपाट, लड़कियों से छेड़छाड़ आदि मामले सामने आये है।
जैसे मामले सामने आते रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि इन घटनाओं पर पुलिस हमेशा “आँखें मूंद लेती है” ओर सुनना बंद हो जाता है।
इसी बीच दक्ष की टीम द्वारा विरोध करने पर दरोगा द्वारा उन पर 5 लाख की रंगदारी माँगने का झूठा आरोप लगा दिया गया। दक्ष ने चालाकी से पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली और उसे फेसबुक पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
वायरल कॉल: पुलिस की किरकिरी बढ़ी
वायरल कॉल में:
दोनों पक्षों की उग्र शैली
ठेके पर अवैध गतिविधियों का मुद्दा
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
और ‘वर्दी उतरवा दूँगा’ जैसे वाक्य
स्पष्ट तौर पर सुने जा सकते हैं।
विवाद बढ़ने के बाद क्षेत्रीय पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि:
“जब ठेके के पास लगातार अपराध होते रहे, तब पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
और अब ब्रज को मदिरा-मुक्त बनाने वाले युवाओं पर ही कार्रवाई क्यों?”
कानून हाथ में लेने के आरोप बनाम पुलिस की ‘ओवरऐक्टिविटी’
पुलिस का कहना है कि किसी भी दुकान खासकर शराब ठेके का जिसका लाइसेंस हो, उसका शटर गिरवाना कानून हाथ में लेने जैसा है, इसलिए कानून के मुताबिक धाराऐ लगाई जायेगी।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि—
“अगर अवैध कार्य हो रहे हों तो पुलिस कार्रवाई करे, न कि झूठे मामले बनाकर दवाब डाले।”
अब मामला तेजी से मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है। कई चैनलों ने भी फोन-कॉल ऑडियो चलाकर बहस शुरू कर दी है। जिसकी चमक राजधानी दिल्ली तक चमक बना चुकी है।
अगला कदम किसका?
ब्रज में ‘मांस-मदिरा मुक्त’ आंदोलन के बीच यह विवाद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—
क्या प्रशासन युवाओं की धार्मिक-सामाजिक भावनाओं के साथ खड़ा होगा या ठेकों के पक्ष में?
इस प्रकरण पर अभी तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन दबाव बढ़ता दिख रहा है।
रविंद्र आर्य
(विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं।)