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नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में ₹9000 करोड़ का घोटाला

प्रकाशित: 25 Feb 2025

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में CBI और ED को जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने बिल्डरों, कंसोर्टियम और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच करने को कहा है।

स्पोर्ट्स सिटी घोटाला: हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने चार में से तीन स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं को कवर करते हुए 10 अलग-अलग फैसले दिए। कोर्ट ने स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार का 'विशेष उदाहरण' बताया और भूमि उपयोग उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता, दिवालियापन प्रक्रिया और खेल सुविधाओं के अधूरेपन की विस्तृत जांच के आदेश दिए।

कोर्ट ने कहा कि डेवलपर्स ने नोएडा प्राधिकरण से महत्वपूर्ण लाभ और रियायतें लेने के बावजूद खेल सुविधाओं के विकास के बजाय केवल व्यावसायिक निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया।

चार सेक्टरों में तीन प्रमुख डेवलपर्स पर सवाल

  • सेक्टर 78, 79 और 101 में जनाडु एस्टेट प्रमुख डेवलपर है।
  • सेक्टर 150 में लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन द्वारा दो स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाएं विकसित की गई थीं।
  • लॉजिक्स की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना वर्तमान में दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसे कोर्ट ने वित्तीय और कानूनी दायित्वों से बचने की रणनीति बताया।

सीएजी रिपोर्ट में उजागर हुआ ₹9000 करोड़ का घोटाला

CAG ऑडिट रिपोर्ट में स्पोर्ट्स सिटी आवंटन में भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इससे नोएडा प्राधिकरण और राज्य सरकार को ₹9000 करोड़ का नुकसान हुआ।

  • बिल्डरों को कम कीमत पर जमीन दी गई।
  • नोएडा प्राधिकरण को दरकिनार कर स्वामित्व का अनाधिकृत ट्रांसफर किया गया।
  • लीज प्रीमियम, जुर्माना और ट्रांसफर चार्ज तक नहीं चुकाए गए।
  • खेल सुविधाओं के अधूरे रहने के बावजूद बिल्डरों को अधिभोग प्रमाणपत्र जारी किए गए।

सीएजी रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कोर्ट ने कहा कि CAG की रिपोर्ट 2021 में पब्लिश हुई थी, लेकिन नोएडा प्राधिकरण और राज्य सरकार ने न तो बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज की और न ही बकाया वसूली की कोई ठोस कार्रवाई की। केवल भुगतान के लिए नोटिस भेजे गए, जिन पर कोई असर नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण में कई बड़े अधिकारी आए और गए, लेकिन किसी ने घोटाले की भरपाई की कोशिश नहीं की।

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का उद्देश्य और अनियमितताएं

2004 में नोएडा प्राधिकरण ने विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का प्रस्ताव रखा।

  • 2007 में 311.60 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई, जिसे 2008 में 346 हेक्टेयर कर दिया गया।
  • 2010 में भूमि क्षेत्र घटाकर 150 हेक्टेयर कर दिया गया।
  • 2010-11 से 2015-16 के बीच 798 एकड़ भूमि पर चार स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाएं शुरू की गईं।
  • परियोजना में गोल्फ कोर्स, मल्टीपर्पज प्ले फील्ड, टेनिस सेंटर, स्विमिंग सेंटर, इंडोर स्टेडियम और क्रिकेट अकादमी जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं, लेकिन इन्हें पूरा नहीं किया गया।

मार्च 2024 तक चार बिल्डरों पर नोएडा प्राधिकरण का भारी बकाया

सेक्टरडेवलपरबकाया राशि (₹ करोड़ में)78, 79, 101जनाडु एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड1356.88SC-01/150लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड2964.23SC-02/150लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड2969.87

राज्य सरकार को वित्तीय अनियमितता की जांच करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोएडा प्राधिकरण को बकाया वसूली और कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। साथ ही, राज्य सरकार को वित्तीय कुप्रबंधन और धोखाधड़ी की आगे की जांच शुरू करनी चाहिए।

CBI और ED जांच के आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में दोषी बिल्डरों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।