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इस तरह तो नहीं साफ़ हो पाएगी गंगा - हो गया है बुरा हाल

प्रकाशित: 12 Feb 2026

वाराणसी: काशी के घाटों को स्वच्छ बनाने के तमाम सरकारी दावों के बीच सिंधिया घाट से आई तस्वीरें प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर कर रही हैं। यहाँ रोज़ाना सैकड़ों लोग खुलेआम गंगा में साबुन लगाकर नहा रहे हैं और भारी मात्रा में कपड़े कचार रहे हैं। डिटर्जेंट और केमिकल के सीधे पानी में मिलने से गंगा का प्रदूषण स्तर फिर से चिंताजनक स्थिति में पहुँच गया है।

हैरानी की बात यह है कि घाटों पर तैनात निगरानी तंत्र इस पूरी गतिविधि से बेखबर बना हुआ है। प्रशासन की यह ढिलाई उन करोड़ों रुपयों पर पानी फेर रही है जो 'नमामि गंगे' जैसे अभियानों के तहत नदी की सफाई के लिए आवंटित किए गए हैं।

देखें वीडियो - https://www.youtube.com/shorts/rIBChjKP6Rs

सुधार के लिए जरूरी कदम (प्रशासनिक सुझाव)

गंगा की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रशासन को निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है:

  • जुर्माना और प्रवर्तन (Strict Penalty): केवल चेतावनी से काम नहीं चलेगा। घाटों पर कपड़े धोने या साबुन का उपयोग करने वालों पर मौके पर ही भारी आर्थिक दंड (Spot Fine) लगाया जाना चाहिए।

  • चौबीस घंटे निगरानी (24/7 Monitoring): सिंधिया घाट जैसे संवेदनशील पॉइंट्स पर सीसीटीवी कैमरे और नगर निगम के प्रवर्तन दल (Enforcement Squad) की तैनाती शिफ्ट में होनी चाहिए।

  • पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग: घाटों पर लगे लाउडस्पीकर्स के माध्यम से लगातार नियमों की जानकारी दी जाए और उल्लंघन करने वालों को सार्वजनिक रूप से सचेत किया जाए।

अगर समय रहते इन सुझावों पर अमल नहीं किया गया, तो प्रशासन की यह अनदेखी गंगा के अस्तित्व और काशी की छवि, दोनों को गहरा नुकसान पहुँचाएगी।