वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी की गलियों में निकली भव्य शिवबारात इस बार बेहद खास रही। ढोल-नगाड़ों और डमरूओं की गूंज के बीच जब महादेव की बारात अस्सी से गोदौलिया की ओर बढ़ी, तो श्रद्धालुओं की...
वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी की गलियों में निकली भव्य शिवबारात इस बार बेहद खास रही। ढोल-नगाड़ों और डमरूओं की गूंज के बीच जब महादेव की बारात अस्सी से गोदौलिया की ओर बढ़ी, तो श्रद्धालुओं की भीड़ में एक चिर-परिचित चेहरा देखकर लोग ठिठक गए। ये कोई और नहीं, बल्कि अपनी ज़मीन से जुड़ी अदाकारी के लिए मशहूर अभिनेता संजय मिश्रा थे।
'का गुरू कइसनल लगल बनारस'
संजय मिश्रा पूरी तरह से बनारसी रंग में रंगे नजर आए। माथे पर त्रिपुंड और चेहरे पर वही सहज मुस्कान। जैसे ही बारात में शामिल स्थानीय युवाओं की नजर उन पर पड़ी, बनारसी ठसक के साथ आवाज गूंजी— "का गुरू, कइसनल लगल बनारस?" इस सवाल पर संजय मिश्रा ने कुछ बोला तो नहीं, लेकिन उनकी रहस्यमयी और आत्मीय मुस्कान ने सबकुछ कह दिया। उनकी उस चुप्पी और मुस्कुराहट में बनारस के प्रति वही पुराना प्रेम साफ़ झलक रहा था, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी निहाल हो गए।
देखें वीडियो - https://www.youtube.com/shorts/C_zkh-EwDhg
This video is original work by Vikas Kumar
शिव के गणों के साथ मिलाया ताल से ताल
संजय मिश्रा महज़ एक अतिथि बनकर नहीं, बल्कि शिवबारात का हिस्सा बनकर शामिल हुए। भूत-पिशाच, अघोरी और देवी-देवताओं के स्वरूपों के बीच संजय मिश्रा एकदम रमे हुए थे। माथे पर भस्म का त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला पहने, वे पूरी तरह से शिव की भक्ति और बनारस की मस्ती में डूबे दिखे।