बहराइच।महसी विकासखंड के ग्राम पंचायत रमवापुर खुर्द में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के वातावरण में हुआ। इस पावन कथा का आयोजन ग्रामवासी डा देवी प्रसाद तिवारी द्...
बहराइच।महसी विकासखंड के ग्राम पंचायत रमवापुर खुर्द में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के वातावरण में हुआ। इस पावन कथा का आयोजन ग्रामवासी डा देवी प्रसाद तिवारी द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धाभाव से किया गया था। कथा का वाचन जनपद सीतापुर से पधारे प्रसिद्ध कथा वाचक पं. उमाशंकर पाठक ‘निराला’ ने किया।
कथा के सातवें दिन पं. पाठक ने रुक्मणी विवाह प्रसंग का दिव्य वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित भक्तगण भक्ति और आनंद में सराबोर हो उठे। पूरे पंडाल में “जय श्रीकृष्ण”, “राधे-राधे” के जयघोष गूंज उठे। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के दिव्य मिलन का वर्णन इतने भावपूर्ण ढंग से किया गया कि श्रद्धालु भावविभोर हो गये
पं. उमाशंकर पाठक ‘निराला’ ने अपने प्रवचन में कहा कि — “बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।” उन्होंने इस दोहे का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया कि जब तक मनुष्य को सत्संग — अर्थात् अच्छे लोगों और संतों की संगति — नहीं मिलती, तब तक उसके भीतर विवेक और सच्ची समझ का उदय नहीं होता। और यह सत्संग भी भगवान की कृपा से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में यदि ईश्वर की कृपा और सज्जनों का साथ मिल जाए, तो जीवन का हर दुःख सहजता से मिट सकता है।
कथा स्थल को भव्य रूप से सजाया गया था। पूरे पंडाल में रंग-बिरंगी झालरें, फूलों की मालाएं और दीपों की रोशनी ने भक्तिमय वातावरण को और भी मोहक बना दिया था। प्रतिदिन कथा प्रारंभ होने से पहले भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ और पुरुष सम्मिलित हुए।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था थी
इस पावन अवसर पर ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। कार्यक्रम में अमृत लाल अवस्थी, रामकिशोर द्विवेदी, रामनारायण त्रिवेदी, राजकुमार तिवारी, हरेराम अवस्थी, अनिल शुक्ल, रंजीत यादव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कथा के अंतिम दिन आरती और पूर्णाहुति के बाद सभी भक्तों ने मिलकर “हरि नाम संकीर्तन” किया। इस अवसर पर पूरा वातावरण “जय श्रीकृष्ण” और “हरि बोल” के मंत्रों से गूंज उठा। कथा के समापन पर पं. उमाशंकर पाठक ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो भी भक्त श्रद्धा से भगवान की कथा सुनता है, उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
ग्राम रमवापुर खुर्द में संपन्न हुई यह सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा न केवल धार्मिक दृष्टि से सफल रही, बल्कि इसने समाज में एकता, भक्ति और सद्भाव का संदेश भी दिया। उपस्थित जनसमूह ने इसे एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया और अगले वर्ष पुनः ऐसे ही आयोजन की कामना की।