400 साल पुराने झरना कुट्टी मंदिर में गूंजा धर्म का शंखनाद, धनंजय दास बने नए महंथभटनी (देवरिया)। क्षेत्र के घांटी खास गांव स्थित लगभग 400 वर्ष प्राचीन झरना कुट्टी मंदिर में शनिवार को आस्था, परंपरा और व...
400 साल पुराने झरना कुट्टी मंदिर में गूंजा धर्म का शंखनाद, धनंजय दास बने नए महंथ
भटनी (देवरिया)। क्षेत्र के घांटी खास गांव स्थित लगभग 400 वर्ष प्राचीन झरना कुट्टी मंदिर में शनिवार को आस्था, परंपरा और वैदिक रीति-रिवाजों के बीच धनंजय दास महाराज का विधिवत पट्टाभिषेक कर उन्हें महंथ पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस भव्य आयोजन में दूर-दराज से आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
पूर्व निर्धारित तिथि 18 अप्रैल को आयोजित इस समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राजेश्वर पैकौली पौहारी महाराज ने परंपरागत विधि से धनंजय दास को चादर ओढ़ाकर, तिलक लगाकर और कंठी पहनाकर गद्दी सौंपी। जैसे ही पट्टाभिषेक की रस्म पूरी हुई, मंदिर परिसर जयकारों और हरि नाम के उद्घोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर झरनापार पश्चिम कुटी के महंथ गुरुचरण दास महाराज ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में कई शिष्य बनाए जाते हैं, लेकिन महंथ पद उसी को दिया जाता है, जो मंदिर में रहकर ठाकुर जी की सेवा, राग-भोग और संरक्षण का दायित्व निभाता है। उन्होंने बताया कि धनंजय दास ने वर्षों तक निरंतर सेवा और समर्पण का परिचय दिया है, इसलिए उन्हें उत्तराधिकारी चुना गया।
पट्टाभिषेक की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए स्टांप पत्र पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए। समारोह में विभिन्न मठों के महंथों सहित बड़ी संख्या में साधु-संत और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह पट्टाभिषेक समारोह न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल भी बनकर सामने आया।