देवरिया में शिक्षा के नाम पर ‘वसूली केंद्र’ बनते स्कूल, अभिभावकों में आक्रोशदेवरिया जनपद में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के कई निजी स्कूलों पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा को सेव...
देवरिया में शिक्षा के नाम पर ‘वसूली केंद्र’ बनते स्कूल, अभिभावकों में आक्रोश
देवरिया जनपद में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के कई निजी स्कूलों पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि खुला कारोबार बना दिया है। ट्रांसपोर्ट फीस से लेकर ड्रेस और किताबों तक, हर मोर्चे पर अभिभावकों से मनमाना पैसा वसूला जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा तय की गई दुकानों से ही ड्रेस और किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। इन दुकानों पर सामान बाजार कीमत से कहीं अधिक दामों पर बेचा जा रहा है। मजबूरी यह है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए अभिभावकों को यह आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा नाराजगी ट्रांसपोर्ट शुल्क को लेकर है। कई स्कूलों में दूरी और सुविधाओं की परवाह किए बिना एक समान और ऊंची फीस वसूली जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि यह पूरी व्यवस्था सुनियोजित तरीके से चल रही है, जिसमें उनकी जेब ढीली कराना ही मुख्य उद्देश्य बन गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्कूल प्रबंधन के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द ही इस मनमानी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो शिक्षा व्यवस्था पर से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि फीस संरचना, किताबों और ड्रेस की खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर अभिभावकों की आवाज यूं ही दबकर रह जाएगी।