GDA जोन-4 के JE प्रशांत मिश्रा पर गंभीर आरोप : घूसखोरी से लेकर गलत आख्या प्रस्तुत करने तक के दावे
गाजियाबाद। जीडीए विभाग के जोन-4 में तैनात जेई प्रशांत मिश्रा पर एक शिकायतकर्ता द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जेई प्रशांत मिश्रा पर लगाए गए आरोप एक-दो नहीं, बल्कि चार से पांच गंभीर आरोपों की संख्या में हैं। शिकायतकर्ता ने मामले में घूस मांगने, अपने जांच क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई का दबाव बनाने, गलत आख्या प्रस्तुत करने और कार्रवाई में कथित तौर पर भेदभाव करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जेई प्रशांत मिश्रा ने उनसे दो लाख रुपये तक की घूस की मांग की। शिकायतकर्ता के मुताबिक जिस स्थान पर जाकर अवैध निर्माण अथवा गलत तरीके से जमीन घेरने का नोटिस दिया गया था, वह स्थान कथित रूप से जेई प्रशांत मिश्रा के जांच क्षेत्र में आता ही नहीं है। शिकायतकर्ता ने उक्त जमीन को लाल डोरी की जमीन बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता ने जोन-4 के सेक्टर-9 विजयनगर स्थित मकान नंबर 574 को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके मकान पर मानसिक दबाव बनाने की नीयत से वहां दो दुकानों का उल्लेख करते हुए सील करने के आदेश प्रस्तुत कराए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक जब उन्होंने जेई प्रशांत मिश्रा से पूछा कि उनके मकान में दुकान कहां है और किस चीज की दुकान है, तो कथित तौर पर आज तक इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
वहीं मकान नंबर 558, सेक्टर-9, विजयनगर, गाजियाबाद को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मकान को सील करने के लिए जेई प्रशांत मिश्रा चार बार मौके पर मैफोर्स और दल-बल के साथ पहुंचे। शिकायतकर्ता के अनुसार हाईकोर्ट की रिट दिखाने से पहले वह सील लगाने की कार्रवाई के लिए पहुंचे थे, लेकिन मौके पर सील लगाए बिना वापस लौट गए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने जेई प्रशांत मिश्रा से सील न लगाने का कारण पूछा तो बताया गया कि मौके पर उनका काफी विरोध किया गया तथा सील लगाने की कार्रवाई में बाधा उत्पन्न की गई। शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि सरकारी कार्य में वास्तव में बाधा उत्पन्न की गई थी तो संबंधित लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने का मुकदमा क्यों दर्ज नहीं कराया गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मकान नंबर 558, सेक्टर-9, विजयनगर में आवासीय मकान में कई वर्षों से कथित रूप से अवैध गोदाम संचालित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके घर के सामने रोजाना बड़े-बड़े ट्रकों से माल लाया और ले जाया जाता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इसी संबंध में जोन-4 के जेई प्रशांत मिश्रा से शिकायत की थी, जिसके बाद जेई मौके पर कार्रवाई के लिए पहुंचे, लेकिन कथित तौर पर बिना कार्रवाई के वापस लौट गए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त मकान को सील करने के लिए जेई प्रशांत मिश्रा चार बार मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद मकान को सील नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद कार्रवाई की मांग करने वाले शिकायतकर्ता को ही दबाव में लेने का प्रयास शुरू किया गया और उनके घर पर नोटिस भेजे जाने लगे।
शिकायतकर्ता के अनुसार 15 अगस्त के दिन, जो अवकाश का दिन था, उस दिन भी उनके घर पर नोटिस देने की कार्रवाई की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जोन-4 में कथित अवैध गोदाम और दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थता के चलते उन्हें ही नोटिस देकर डराने और दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि पूर्व में लगाए गए दो लाख रुपये की घूस मांगने के आरोप की जांच एसीपी द्वारा की जा रही है। शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में उनके पास चार गवाह भी मौजूद हैं।
हाईकोर्ट के स्टे को लेकर भी सवाल
मकान नंबर 558, सेक्टर-9, ए ब्लॉक, विजयनगर के शिकायतकर्ता का कहना है कि वह पिछले लगभग तीन वर्षों से इस मकान में कथित अवैध गोदाम और दुकान संचालन की शिकायत करता आ रहा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक गोदाम के कारण उनके घर के सामने रोजाना जाम की स्थिति बनती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जीडीए विभाग द्वारा आज तक इस मकान पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने जीडीए विभाग से पूछा कि मकान नंबर 558 को आज तक सील क्यों नहीं किया गया, तो जेई प्रशांत मिश्रा की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट से स्टे है। शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने हाईकोर्ट के कथित स्टे की छायाप्रति मांगी तो उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने के बजाय आरटीआई के माध्यम से कॉपी प्राप्त करने की बात कही गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आईजीआरएस पर प्रस्तुत आख्या में हाईकोर्ट के स्टे की कॉपी संलग्न होने का उल्लेख किया गया, लेकिन आज तक शिकायतकर्ता को उक्त स्टे की छायाप्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि आरटीआई के माध्यम से ही दस्तावेज लेना है तो आईजीआरएस की आख्या में हाईकोर्ट स्टे की कॉपी संलग्न किए जाने का उल्लेख क्यों किया गया।
बिल्डरों से मिलीभगत का भी लगाया आरोप
शिकायतकर्ता ने जोन-4 के अंतर्गत जीडीए विभाग द्वारा आवंटित किए गए मकानों को तोड़कर कुछ बिल्डरों द्वारा कथित रूप से फ्लैट बनाए जाने और उन्हें बेचने के आरोप भी लगाए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पूरे मामले में जेई प्रशांत मिश्रा के साथ कथित मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण कर पहले आम जनता को फ्लैट बेच दिए जाएंगे और बाद में शिकायत होने पर उन्हीं मकानों और फ्लैटों को नक्शे के अनुसार नहीं बनाए जाने का नोटिस देकर खरीददारों से कथित रूप से मोटी रकम वसूलने का खेल खेला जा सकता है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए। साथ ही जेई प्रशांत मिश्रा के खिलाफ लगाए गए घूसखोरी, गलत आख्या प्रस्तुत करने, कथित मिलीभगत और कार्रवाई में भेदभाव जैसे आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारी की संपत्ति की भी जांच कराए जाने की मांग की है।