गोरखपुर। शहीद-ए-आज़म भगतसिंह की जयंती (28 सितंबर) के अवसर पर दिशा छात्र संगठन द्वारा ‘स्मृति संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई। अभियान के तहत शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में क्...
गोरखपुर। शहीद-ए-आज़म भगतसिंह की जयंती (28 सितंबर) के अवसर पर दिशा छात्र संगठन द्वारा ‘स्मृति संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई। अभियान के तहत शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में क्रांतिकारी गीत, कविता पाठ और माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत जोशीले गीत “मेरा रंग दे बसंत चोला” के सुरों से की गई, जिसमें छात्रों ने भावपूर्ण सहभागिता दर्ज कराई।
दिशा छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि भगतसिंह सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि आज भी न्यायप्रिय युवाओं के लिए प्रेरणा, जोश और कुर्बानी का प्रतीक हैं। मात्र 23 वर्ष की आयु में शहादत देकर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन को नई धार दी। वक्ताओं ने कहा कि भगतसिंह ने अपने लेखन, विचारों और संघर्ष के माध्यम से उस दौर में युवाओं की चेतना को जगाया था और आज भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में छात्रों ने कहा कि सत्ता तंत्र ने कई बार क्रांतिकारियों की स्मृति को भुलाने की कोशिश की, लेकिन भगतसिंह जैसे नायकों का स्थान जनता के दिलों से कभी मिट नहीं सका। इतिहास की किताबों में उन्हें सीमित पैराग्राफों में समेटने का प्रयास जरूर हुआ, मगर समाज के मन में वे हमेशा अमर रहे।
संगठन के सदस्यों ने यह चिंता भी जताई कि आज देश की बड़ी आबादी भगतसिंह की वीरता को तो जानती है, पर उनके विचारों, सपनों और समाज के लिए उनके विज़न से अनभिज्ञ है। उन्होंने कहा कि आज जिन नायकों को युवाओं के सामने आदर्श रूप में स्थापित किया जा रहा है, वे केवल मनोरंजन तक सीमित हैं और समाज को दिशा देने में सक्षम नहीं हैं।
छात्रों ने कहा कि भगतसिंह ने जिस समाजवाद, समानता और शोषणमुक्त भारत का सपना देखा था, उसकी चर्चा अब बहुत कम होती है। ऐसी परिस्थितियों में उनके विचारों और सपनों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक और जनशैक्षिक अभियानों की जरूरत है।
दिशा छात्र संगठन ने बताया कि ‘स्मृति संकल्प अभियान’ के तहत विश्वविद्यालय और शहर के अन्य हिस्सों में नुक्कड़ नाटक, विचार गोष्ठी, फ़िल्म प्रदर्शन, कविता पाठ और क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से संवाद चलाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि भगतसिंह को केवल प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि वैचारिक प्रेरणा के रूप में याद किया जाए।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने भगतसिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।