गोरखपुर। उरुवा क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे श्रीमती शोभा देवी पब्लिक स्कूल, धुरियापार में खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने आवश्यक निरीक्षण के बाद तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। यह विद्यालय क...
गोरखपुर। उरुवा क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे श्रीमती शोभा देवी पब्लिक स्कूल, धुरियापार में खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने आवश्यक निरीक्षण के बाद तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। यह विद्यालय कक्षा एक से इंटर तक छात्रों को पढ़ा रहा था, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि इसके पास किसी प्रकार के मान्यता-पत्र या कानूनी दस्तावेज नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार, उरुवा क्षेत्र में इस प्रकार के कई विद्यालय बिना मान्यता संचालित हो रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि कई बार ऐसे विद्यालयों को बंद किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह पुनः संचालन में आ जाते हैं। ऐसे मामलों में विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई की जाती है।
इस बार जब खंड शिक्षा अधिकारी ने धुरियापार क्षेत्र का दौरा किया और श्रीमती शोभा देवी पब्लिक स्कूल में कक्षा एक से 12 तक चल रहे संचालन की जांच की, तो विद्यालय प्रबंधन से मान्यता प्रमाण पत्र की कॉपी मांगी गई। लेकिन प्रबंधन ने इसे प्रस्तुत नहीं किया। जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय का संचालन फर्जीवाड़े के तहत किया जा रहा था।
खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय को तत्काल बंद करने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि जब तक मान्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक विद्यालय को किसी भी हालत में खोलने की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में प्रबंधन द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया तो विभाग द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि सभी छात्रों को मान्यता प्राप्त और सुरक्षित शिक्षा मिले। बिना मान्यता संचालित विद्यालय में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए भी खतरा उत्पन्न होता है। इसलिए विभाग लगातार ऐसे विद्यालयों पर निगरानी रख रहा है और समय-समय पर निरीक्षण कर रहा है।
उरुवा क्षेत्र में इस कार्रवाई के बाद स्थानीय अभिभावकों में राहत की भावना है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि उनके बच्चों को कानूनी मान्यता प्राप्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। खंड शिक्षा अधिकारी ने क्षेत्र के सभी विद्यालयों से अपील की कि वे समय पर सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करें और नियमों का पालन करें।
इस कदम से शिक्षा विभाग की नीति स्पष्ट हो गई है कि बिना मान्यता संचालित विद्यालयों पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।