गोरखपुर। नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत, नई दिल्ली एवं मिशन शक्ति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में “कवि सम्मेलन–2025” का भव्य आयोजन हुआ। इस वर...
गोरखपुर। नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत, नई दिल्ली एवं मिशन शक्ति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में “कवि सम्मेलन–2025” का भव्य आयोजन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “नारी शक्ति, भावना की अभिव्यक्ति” रखा गया, जिसमें देश के प्रख्यात कवियों ने नारी सशक्तिकरण, मातृत्व, प्रेम, संघर्ष और संवेदना जैसे विषयों पर अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।
कार्यक्रम की संरक्षिका विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन रहीं, जिन्होंने कहा कि — “कविता समाज का दर्पण है। नारी सृजन की आधारशिला है, उसके बिना न जीवन संभव है, न संस्कृति।” उन्होंने कहा कि आज की कविताओं में नारी के साहस, संवेदनशीलता और आत्मसम्मान की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. विनिता पाठक एवं सह-संयोजन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों में आकृति विजा ‘अर्पणा’, चेतना पाण्डेय, सरवत जमाल, मृतुंजय नवल, निखिल पाण्डेय, अरुण पाण्डेय, चारुशिला सिंह, विनिता मिश्रा, अमित उपाध्याय, प्रशान्त मिश्र ‘मन’, देवेंद्र आर्य, कुमार आशु, कुंवर सचिन सिंह एवं सलीम मज़हर जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के क्रीड़ांगन में अपराह्न तीन बजे हुआ। उद्घाटन के साथ ही कवयित्री आकृति विजा ‘अर्पणा’ ने “स्त्री वह नहीं जो टूटे, वह तो हर बिखराव में खुद को नए रूप में जोड़ लेती है” जैसी पंक्तियों से समां बाँधा। चेतना पाण्डेय ने मातृत्व की गरिमा पर केंद्रित कविता से दर्शकों को भावविभोर किया। वहीं प्रशान्त मिश्र ‘मन’ और कुमार आशु ने समाज में नारी के संघर्ष और व्यंग्यात्मक परिस्थितियों पर आधारित कविताओं से खूब तालियाँ बटोरीं।
कवियों की रचनाओं में नारी के भीतर छिपे आत्मविश्वास, संघर्ष और करुणा का सुंदर संगम देखने को मिला। सरवत जमाल और सलीम मज़हर ने अपनी ग़ज़लों में नारी को “सृजन की शाश्वत ज्योति” कहा, जबकि चारुशिला सिंह और विनिता मिश्रा ने नारी शिक्षा और समान अवसर की आवश्यकता पर जोर दिया।
समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने किया। उन्होंने कहा कि — “कविता के माध्यम से नारी की भावना और अस्तित्व को सम्मानित करने की यह परंपरा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।”