गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा GNIOT Institute of Management Studies, Greater Noida के सहयोग से "समय एवं तनाव प्रबंधन" विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्य...
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा GNIOT Institute of Management Studies, Greater Noida के सहयोग से "समय एवं तनाव प्रबंधन" विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला महा योगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में महिला सशक्तिकरण और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता बृजेश भाटिया, लीड स्ट्रैटेजी – कॉरपोरेट लर्निंग एवं आउटरीच कैटालिस्ट, ने महिलाओं की सामाजिक और कार्यक्षेत्र में बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावी टाइम और स्ट्रेस मैनेजमेंट महिलाओं को चुनौतियों का सामना करने, जीवन में संतुलन बनाने और व्यक्तिगत तथा पेशेवर लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. पूनम टंडन के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि महिलाएँ समाज की नींव हैं और उनका विकास राष्ट्र की प्रगति, लैंगिक समानता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद मिशन शक्ति-5.0 की नोडल अधिकारी मेजर प्रो. विनीता पाठक ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे और अन्य वरिष्ठ शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. एस. वी. पाठक, बैंकिंग एवं इंश्योरेंस संयोजक डॉ. मनीष कुमार, डॉ. अमित उपाध्याय सहित कई विभागों के शिक्षकगण ने भाग लिया। संचालन का कार्य डॉ. फ़रोज़न ने किया, जबकि डॉ. खुशबू, डॉ. अंशिका, डॉ. पूर्णिमा और डॉ. अभिषेक ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कार्यशाला को और प्रभावशाली बनाया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने समय प्रबंधन, तनाव नियंत्रण, प्राथमिकताएं तय करना और कार्य-संतुलन बनाए रखना जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। महिलाओं को प्रेरित किया गया कि वे अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में इन तकनीकों का इस्तेमाल करें।
इस कार्यशाला ने न केवल महिलाओं की नेतृत्व और सशक्तिकरण क्षमताओं को मजबूत किया, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में प्रभावी और संतुलित निर्णय लेने के लिए तैयार किया। गोरखपुर विश्वविद्यालय और GNIOT Institute के सहयोग से आयोजित यह पहल महिलाओं के विकास और समय-संग्रहण कौशल को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।