Gorakhpur News, भारत की परंपरा गतिशील है और इसी गतिशीलता में उसका जीवन-स्रोत निहित है: प्रो. आनंद प्रकाश, “ज्ञान का वर्धन आलोचना व समालोचना में होता है” -राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रो. आनंद प्रकाश
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भारत की परंपरा गतिशील है और इसी गतिशीलता में उसका जीवन-स्रोत निहित है: प्रो. आनंद प्रकाश : “ज्ञान का वर्धन आलोचना व समालोचना में होता है” -राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रो. आनंद प्रकाश

“ज्ञान का वर्धन आलोचना व समालोचना में होता है” -राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रो. आनंद प्रकाश

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गोरखपुर, 16 सितम्बर।दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “मानसिक स्वास्थ्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा: योग एवं अन्य दर्शनों का योगदान” तथा...

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