गोरखपुर।प्रदेश में बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मचारियों का विरोध दिन-ब-दिन तीव्र होता जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर...
गोरखपुर।
प्रदेश में बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मचारियों का विरोध दिन-ब-दिन तीव्र होता जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में बिजलीकर्मी मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर एकत्र हुए और जोरदार प्रदर्शन किया। निजीकरण के खिलाफ नारों से आस-पास का इलाका गूंज उठा।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समिति के संयोजक इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, "मुनाफे का निजीकरण और घाटे का राष्ट्रीयकरण किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर ऊर्जा मंत्री स्वयं यह मानते हैं कि बिजली वितरण एक जनसेवा है, तो उन्हें तुरंत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को रद्द करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली मिलेगी और सेवा की गुणवत्ता में गिरावट आएगी। निजी कंपनियां लाभ के लिए काम करती हैं, न कि जनहित के लिए। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को नुकसान होगा, बल्कि हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। रोजगार की सुरक्षा, सेवाओं की स्थिरता और कर्मचारियों के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे।
इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की नहीं है, बल्कि आम जनता की भी है। निजी कंपनियां लाभ के लिए दरें बढ़ा सकती हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की कमर टूटेगी। यदि सरकार ने समय रहते निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी होगा और इसका असर व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा।"
प्रदर्शन में भारी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और सभी ने एकजुट होकर निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारी बैनर और पोस्टर लिए हुए थे जिन पर लिखा था—"जनसेवा नहीं बिकेगी", "बिजली निजीकरण वापस लो", "कर्मचारी एकता जिंदाबाद"।
कर्मचारियों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द ही निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति पर काम किया जा रहा है, जिसमें कार्य बहिष्कार, बिजली आपूर्ति के कामों से दूरी और जिलावार विरोध प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का यह प्रदर्शन सरकार के लिए एक गंभीर संदेश है कि यदि कर्मचारी हितों और जनसेवा के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी की गई, तो आने वाले समय में प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जनता और कर्मचारियों की एकजुटता अब यह दर्शा रही है कि निजीकरण का मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक और जनहित का विषय बन चुका है।