गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं स्त्रातज़िक अध्ययन विभाग में आज (26 सितंबर 2025) सत्र 2024-25 के दौरान सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ आचार्य प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी के सम्मान...
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं स्त्रातज़िक अध्ययन विभाग में आज (26 सितंबर 2025) सत्र 2024-25 के दौरान सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ आचार्य प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी के सम्मान में एक भावभीनी विदाई समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन 30 जून 2025 को प्रो. त्रिपाठी की सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में किया गया था।
समारोह की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा, “प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी एक आदर्श शिक्षक की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया, साथ ही संस्था को अनुशासित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कार्यसंस्कृति प्रदान की।”
विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षकों और सहकर्मियों ने प्रो. त्रिपाठी को एक अग्रणी नेतृत्वकर्ता, उच्चकोटि के शोधकर्ता, कुशल प्रशासक और विवादों से रहित व्यक्तित्व वाला व्यक्ति बताया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रो. त्रिपाठी ने रक्षा एवं स्त्रातज़िक अध्ययन विषय में गहन विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ एक स्थायी छवि स्थापित की है।
इस अवसर पर प्रो. त्रिपाठी ने अपने विश्वविद्यालयीय जीवन के 42 वर्षों की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, “मैंने शिक्षण को कभी नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। विद्यार्थियों के प्रति मेरा समर्पण मेरे भीतर जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव उत्पन्न करता रहा। शिक्षकों का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि जीवन मूल्य सिखाना भी होना चाहिए।”
विद्यापीठ के पूर्व प्रति-कुलपति एवं विभागाध्यक्ष प्रो. हरि सरन, प्रो. प्रदीप कुमार यादव, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, कला संकायाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव, विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. जितेंद्र कुमार मिश्रा, रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, गणित विभाग के प्रो. विजय कुमार, प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव, अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. संदीप दीक्षित एवं प्रो. सत्यपाल सिंह सहित अनेक शिक्षकों ने अपने भावभीने उद्बोधन दिए।
विद्यार्थी, शोध छात्र-छात्राएं, सहायक आचार्य और अन्य विभागों के शिक्षकगण भी इस समारोह में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रो. त्रिपाठी के प्रति कृतज्ञता और शुभकामनाओं के साथ हुआ।