गोरखपुर। ग्राम सभा मठिया में आयोजित नव दिवसीय श्री श्री 108 रुद्र महायज्ञ आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता का अद्भुत संगम बन गया। नौ दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में जहां एक ओर वैदिक अनुष्ठ...
गोरखपुर। ग्राम सभा मठिया में आयोजित नव दिवसीय श्री श्री 108 रुद्र महायज्ञ आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता का अद्भुत संगम बन गया। नौ दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में जहां एक ओर वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने रामकथा और शिवकथा को जीवंत कर दिया। गांव ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्तिमय वातावरण को और अधिक उल्लासपूर्ण बना दिया।
यज्ञ के दौरान शिव-पार्वती विवाह एवं शिव बारात की प्रस्तुति आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। पंडाल “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा जब भूत-प्रेत, गंधर्व, नाग, योगी और राक्षसों के साथ शिव बारात निकाली गई। भगवान शिव की भस्म-लेपित देह, जटाओं में प्रवाहित गंगा, गले में नाग और मस्तक पर चंद्रमा की वेशभूषा ने श्रद्धालुओं को अभिभूत कर दिया। कथा व्यास पं. जे. पी. व्यास ने शिव विवाह प्रसंग को इतना भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया कि पूरा परिसर भक्ति भाव से सराबोर हो गया।
भक्ति और नाटकीयता का संगम तब देखने को मिला जब जय मां आदि शक्ति रामलीला मंडल द्वारा सीता हरण, रावण-मारीच संवाद, भरत मिलाप और रामराज्याभिषेक जैसे प्रसंग मंचित किए गए। आठवें दिन सीता हरण का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं, वहीं अंतिम दिन भरत मिलाप का भावुक प्रसंग उपस्थित जनसमूह को भावविह्वल कर गया। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राजतिलक का दृश्य पूरे पंडाल में उत्सव जैसा वातावरण पैदा कर गया।
रात्रिकालीन भजन संध्याओं में भजन गायक सच्चिदानंद पांडे द्वारा प्रस्तुत “भज मन राम नाम सुखदाई…” और “बम बम बोल रहा है काशी…” जैसे भजनों ने भक्तों को रात भर झूमने पर मजबूर कर दिया। यज्ञ के अंतिम दिन पूर्णाहुति के साथ अग्निहोत्र सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति अर्पित कर अपने जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की।
आयोजन के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश भी प्रसारित हुआ। ग्राम प्रधान चंद्रिका सिंह, पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी राणा प्रताप सिंह, गिरधारी पांडेय, श्रवण सिंह, राजू सिकंदर, भोजपुरी गायक रिंटू पांडे, रंजीत, सुनील सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा दी।
स्थानीय लोगों ने संकल्प लिया कि हर वर्ष ऐसे आयोजन के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करेंगे बल्कि युवा पीढ़ी को भी हमारी सनातन संस्कृति से जोड़ेंगे। इस प्रकार मठिया का यह रुद्र महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर समाप्त हुआ।