गोरखपुर, 17 फरवरी। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय (एमजीयूजी) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित ‘विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्र...
गोरखपुर, 17 फरवरी। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय (एमजीयूजी) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित ‘विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्रयास से सतत विकास’ विषयक संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम में दो विषय-केंद्रित पैनल सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें अधिकारियों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि तेजी से हो रहे विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में कचरे को संसाधन में बदलने की सोच को व्यवहार में लाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और सर्कुलर इकोनॉमी के मॉडल को अपनाने पर बल दिया।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर पहला पैनल सत्र
‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट’ विषय पर आयोजित पहले पैनल सत्र में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण अनिल कुमार, भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी के चेयरमैन राजीव कुमार, गोरखपुर के नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल तथा गैलेंट इंडस्ट्रीज के सीईओ मयंक अग्रवाल ने अपने विचार रखे।
पैनलिस्ट्स ने बताया कि ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, सेग्रीगेशन, कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग की प्रभावी व्यवस्था से न केवल प्रदूषण कम किया जा सकता है, बल्कि रोजगार और ऊर्जा उत्पादन के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। इस सत्र का संचालन संजय भटनागर ने किया।
सस्टेनेबल डेवलपमेंट एवं सर्कुलर इकोनॉमी पर दूसरा सत्र
‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड सर्कुलर इकोनॉमी’ विषयक दूसरे पैनल सत्र में आईआईटी कानपुर के प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी, बीएचयू के प्रो. ए.एस. रघुबंशी, आईआईटी बीएचयू के प्रो. पी.के. मिश्रा, यूपीपीसीबी के चेयरमैन डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह तथा बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के निदेशक प्रवीण गुप्ता शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाकर संसाधनों के दोहन को कम किया जा सकता है और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है। उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय से ही सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
सत्र का संचालन एस.के. तिवारी ने किया। दोनों पैनल सत्रों में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित प्रौद्योगिकी से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। संगोष्ठी ने स्पष्ट किया कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ केवल नारा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और आर्थिक प्रगति का प्रभावी मार्ग बन सकता है।