मानवता की मिसाल: 180 किमी दूर कोटा से कोहरे में पहुँची टीम, डग में हुआ दूसरा नेत्रदानभीषण ठंड और दृश्यता शून्य कर देने वाले घने कोहरे के बीच मानवता की एक अनुकरणीय मिसाल झालावाड़ जिले के डग कस्बे में द...
मानवता की मिसाल: 180 किमी दूर कोटा से कोहरे में पहुँची टीम, डग में हुआ दूसरा नेत्रदान
भीषण ठंड और दृश्यता शून्य कर देने वाले घने कोहरे के बीच मानवता की एक अनुकरणीय मिसाल झालावाड़ जिले के डग कस्बे में देखने को मिली। नाई मोहल्ला निवासी स्वर्गीय केसरीमल जैन के निधन के पश्चात शोक की घड़ी में उनके परिजनों ने समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए नेत्रदान का महान निर्णय लिया।
सूचना मिलते ही 180 किलोमीटर दूर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम घने कोहरे और ठंड के बावजूद देर रात डग पहुँची और सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई।
जागरूकता से टूटी भ्रांतियाँ
ज्योति मित्र कमलेश दलाल, बी.एल. चौधरी, पंकज नाहर एवं स्थानीय पत्रकारों ने परिजनों को नेत्रदान के महत्व और प्रक्रिया की जानकारी दी। पुत्र अमित जैन ने परिवारजनों से चर्चा के बाद पिता के नेत्रदान की सहमति दी।
कोटा से डॉ. गौड़ ‘ज्योति रथ’ लेकर डग पहुँचे और मौके पर उपस्थित महिलाओं सहित अन्य परिजनों की शंकाओं व भ्रांतियों का समाधान करते हुए पूरी प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक संपन्न कराया।
तीन वर्षों बाद डग में दूसरा नेत्रदान
डॉ. गौड़ ने बताया कि डग कस्बे में यह तीन वर्षों बाद दूसरा नेत्रदान है। इससे पूर्व वर्ष 2021 में स्वर्गीय रेखा जैन ने भी शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से नेत्रदान किया था। नेत्रदान के पश्चात संस्था द्वारा परिजनों को ‘नेत्रदान गरिमा पट्टिका’ भेंट कर सम्मानित किया गया।
“चाहे कितनी भी ठंड हो या कोहरा, नेत्रदान की सूचना मिलते ही हमारी टीम 24 घंटे अलर्ट रहती है। दो अंधेरी ज़िंदगियों में रोशनी पहुँचा पाने का सुकून हर थकान मिटा देता है।”
— डॉ. गौड़, शाइन इंडिया फाउंडेशन
जागरूकता शिविर लगाने की घोषणा
अंतिम संस्कार के दौरान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र जैन ने परिजनों के इस प्रेरणादायक कार्य की सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 15 दिनों में ‘जैन सोशल ग्रुप’ के माध्यम से एक विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें कस्बे के नागरिकों से नेत्रदान के संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे।