इंसान तृष्णा वश दुखी रहता है, प्रकति हमें देना सिखाती हैश्री पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का हुआ आयोजनजीवन में जो देता है वो देवता है, संपूर्ण प्रकृति उदार है, बादल हमें वर्षा देते है, फुल सुवास दे...
इंसान तृष्णा वश दुखी रहता है, प्रकति हमें देना सिखाती है
श्री पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का हुआ आयोजन
जीवन में जो देता है वो देवता है, संपूर्ण प्रकृति उदार है, बादल हमें वर्षा देते है, फुल सुवास देता है, सुर्य प्रकाश देता है, चन्द्रमा शितलता देता है, वृक्ष हमें जीवन देते है, नदीया हमें पानी देती है, प्रकृति के पास किसी प्रकार का ‘‘ना‘‘ शब्द नहीं है, इस जगत में एक मात्र इन्सान ऐसा जीवन जो समय आने पर ‘‘हॉ‘‘ नहीं बोलता अपितु ‘‘ना‘‘ ही बोलता है। यदि हमें नकारात्मक विचार एवं ‘‘ना‘ बोलना छोड दे तो यह प्रकृति स्वयं हमें सफल बनता देती है। मनुष्य जीवन पर्यन्त लोभ, मोह, और लालच के सिर्फ लेना चाहता है, और इन्ही तुच्छ इच्छाओं के वशीभूत होकर दुखी रहते है।
श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ में श्री पार्श्वनाथ प्रभु के जन्म कल्याणक के अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विश्वरत्नसागरसूरीजी म.सा. ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते है, उक्त वक्तव्य कहें। आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु के जन्म के समय नरक के जीव भी शांति का अनुभव करते है। तीर्थंकर की जयंति नहीं अपितु कल्याणक मनाया जाता है क्योंकी प्रभु समग्र सृष्टि के लिए कल्याण की कामना लिए अंतिम जन्म लेते है, तथा स्व-पर का कल्याण करत हुए मोक्ष पथ के अनुगामी बनते है। धर्मसभा को श्री तीर्थरत्नसागरजी म.सा. ने भी संबोधित किया।
ज्ञात हो कि महोत्सव में पॉच सौ से अधिक अठ्ठम तप के तपस्वी यहॉ पर रूककर तीन दिवसीय उपवास की तपस्या कर रहे है, प्रवचन के दौरान हजारों श्रावक श्राविकाएॅ ने भक्ति संगीत की धुनो ंपर पार्श्वनाथ प्रभु के जयकारे लगाते हुए हर्षोल्लास पूर्वक जन्म महोत्सव मनाया। संगीतकार त्रिलोक मोदी ने प्रभु के जन्म कल्याण की संगीत के स्वरलहरीयों के साथ मंचन किया, जिसमें लाभार्थी परिवारांं के सदस्यों ने भगवान के माता पिता एवं इन्द्र इन्द्राणी बनकर भगवान की माता को चौदह स्वपनों की नृत्य नाटीकाओं के साथ मंचन किया। इस दौरान महोत्सव आयोजक विरेन्द्र शाह, मुम्बई, रतिलाल विशाल मेहता, घोटी, गौतम जैन आगर, हंसराज जैन, चौमहला, मोहन जैन अकलेरा, अनिल देसरला, आलोट, पारस चौरडीया झार्डा आदि का तीर्थ पेढी की ओर से सचिव धर्मचंद जैन, कोषाध्यक्ष प्रसन्न लोढा, ट्रस्टी बाबुलाल आंचलिया, मोहनलाल कांसवा एवं गौतमचंद ओसवाल तथा मालवा महासंघ के अनिल देसरला आदि ने बहुमान किया। इस दौरान डग विधायक कालुराम वर्मा एवं मुम्बई-नागेश्वर दशम मण्डल के सदस्यों का भी बहुमान किया गया। प्रवचन मे उपवास की तपस्या के लिए अनुमोदना स्वरूप प्रभावना राशि एकत्रित की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुक्त हस्त अनुदान लिखवाकर लाभ लिया।
महोत्सव में प्रातःकाल प्रार्थना एवं भक्तामर पाठ के बाद भगवान के पक्षाल का आयोजन हुआ, तत्पश्चात यहॉ बने विशाल पाण्डाल में भगवान के जन्म कल्याणक का धूमधाम से आयोजन किया गया, महोत्सव आयोजक परिवारों की ओर से समग्र समाज की भोजनप्रसादी एवं साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन भी किया गया। जिसमें तीर्थ यात्रियों सहीत ग्रामीणजनों ने गौतम प्रसादी का लाभ लिया।
दोपहर में साधर्मिक वात्सल्य के पश्चात रथयात्रा निकाली गई जिसमें रथ, इन्द्रध्वजा, हार्थी घोडे, बग्घि एवं बैड बाजे आदि सहीत नवयुवको ंकी टोलियॉ जयकारो ंके नारों के साथ आगे बड रहे थे। शाम को मुख्य मंदिरजी में 1008 दिपक की रोशनी रंगोली एवं विभिन्न प्रकार की गहुलिया कर भव्य रूप से सजावट की गई।
साधर्मिक वात्सल्य में स्थानीय उन्हैल नागेश्वर सहीत आलोट, चौमहला, सुवासरा एवं बडौद आदि से आऐ नवयुवक मण्डल, नवरत्न परिवार, बहु मण्डलों एवं महीला मण्डलों एवं बालिका मण्डलों ने अपनी सराहनीय सेवाएॅ प्रदान की।
आज होगा दीक्षा कल्याण
महोत्सव के तहत् गुरूवार को भगवान के दीक्षा कल्याणक का आयोजन होगा, प्रवचन के दौरान आचार्य श्री द्वारा ‘‘ ओघा है अनमोल‘‘ विशय पर प्रवचन दिये जाऐगें