कानपुर/प्रयागराज, 19 फरवरी 2026: देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान IIT Kanpur के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में बड़ा भूकंप आता है, तो उत्तर प्रदेश के कानपुर ...
कानपुर/प्रयागराज, 19 फरवरी 2026: देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान IIT Kanpur के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में बड़ा भूकंप आता है, तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और प्रयागराज शहरों में जमीन धंसने (लिक्विफेक्शन) के कारण भारी नुकसान हो सकता है। यह अध्ययन गंगा-यमुना के मैदानी क्षेत्रों की भूगर्भीय संरचना और मिट्टी की प्रकृति पर आधारित है, जिसमें पाया गया कि इन क्षेत्रों की ढीली, रेतीली और जलसंतृप्त मिट्टी भूकंपीय झटकों के दौरान अपनी मजबूती खो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लिक्विफेक्शन वह स्थिति होती है जब भूकंप के झटकों से जमीन की मिट्टी तरल जैसी व्यवहार करने लगती है, जिससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ जाती है और संरचनाएँ झुकने या धंसने लगती हैं। कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में बड़ी आबादी, घनी बस्ती और पुराने निर्माण होने के कारण जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि नदी तटों और जलभराव वाले क्षेत्रों में यह खतरा सबसे अधिक है।
वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि शहरी विकास और भवन निर्माण में भूकंपरोधी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग कर जोखिम मूल्यांकन किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन योजनाओं को अद्यतन करने और जनता को जागरूक करने की भी आवश्यकता बताई गई है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य की शहरी योजना और सुरक्षा नीतियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि समय रहते वैज्ञानिक सुझावों को लागू किया जाए, तो संभावित भूकंप आपदा से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस प्रकार, आईआईटी-कानपुर की यह रिसर्च गंगा-यमुना मैदानी क्षेत्र के बड़े शहरों में भूकंपीय जोखिम को लेकर गंभीर चेतावनी मानी जा रही है और सुरक्षित शहरी विकास की आवश्यकता को रेखांकित करती है।