मिरहची (एटा)।मिरहची क्षेत्र के जारथल गांव में बीते कुछ दिनों के भीतर तीन दर्जन से अधिक दुधारू भैंसों की मौत से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, भैंसों की मौत सर्दी के मौसम में...
मिरहची (एटा)।
मिरहची क्षेत्र के जारथल गांव में बीते कुछ दिनों के भीतर तीन दर्जन से अधिक दुधारू भैंसों की मौत से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, भैंसों की मौत सर्दी के मौसम में फैलने वाली बीमारियों—निमोनिया, फुटराट (खुरपका) और कमजोर इम्युनिटी—के कारण हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई किसानों ने कर्ज लेकर भैंसें खरीदी थीं और उन्हीं से उनके परिवार की आजीविका चल रही थी। पशुओं की लगातार हो रही मौतों से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
सूचना मिलने पर उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात गुप्ता, पशु चिकित्सा अधिकारी मिरहची डॉ. अमित कौशल एवं उनकी टीम जारथल गांव पहुंची। टीम ने बीमार पशुओं का निरीक्षण कर उपचार किया तथा आवश्यक दवाओं का वितरण किया। साथ ही ग्रामीणों को पशुओं की उचित देखभाल एवं संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया।
पशु चिकित्सकों ने बताया कि मरने वाली कई भैंसों का इलाज पहले झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा कराया गया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
डॉ. अमित ने बताया कि सर्दी के मौसम में ठंड, नमी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण भैंसें निमोनिया, फुटराट जैसी बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। उन्होंने बचाव के लिए पशुओं को ठंड से बचाने, पर्याप्त गर्माहट, संतुलित आहार सफाई और समय पर प्रशिक्षित पशु चिकित्सक से उपचार कराने की अपील की।