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ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली और ग्राम पंचायत सचिवों पर बढ़ते कार्यभार : विरोध में मिठौरा ब्लाक परिसर में सचिवों ने किया प्रदर्शन

महराजगंज | 06-Dec-2025 06:09 AM | 234 |
महराजगंज
विरोध में मिठौरा ब्लाक परिसर में सचिवों ने किया प्रदर्शन

 

महराजगंज- मिठौरा ब्लाक परिसर में ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं ग्राम विकास अधिकारियों ने अपने मूल दायित्वों के अतिरिक्त अन्य विभागों के कार्य जबरन सौंपे जाने, को लेकर खंड विकास अधिकारी को एक 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा सचिवों ने कहा कि  संसाधनों की कमी, अव्यवहारिक ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली सहित अनेक समस्याओं को लेकर शासन से ठोस एवं न्यायसंगत निर्णय की मांग कर रहें  है। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था उनके कार्य निष्पादन, क्षेत्रीय भ्रमण तथा योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है  शासन के आदेश संख्या 33-1-2025 दिनांक 3 नवम्बर 2025 के क्रम में कई जनपदों में सचिवों की अनिवार्य ऑनलाइन उपस्थिति लागू की जा रही है। जबकि सचिव ग्राम पंचायत कार्यालय के अध्यक्ष होते हैं, ठीक उसी प्रकार जैसे खंड विकास अधिकारी क्षेत्र पंचायत स्तर पर तथा अधिकारीगण जिला स्तर पर कार्यालय अध्यक्ष होते हैं। ऐसे किसी भी स्तर पर ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था नहीं है, अतः सचिवों के लिए अलग नियम बनाना उचित नहीं है।

सचिवों का कार्य पूर्णतः फील्ड आधारित है। एक सचिव के पास औसतन 4 से 9 ग्राम पंचायतों का दायित्व होता है, इसलिए किसी एक स्थान पर निर्धारित समय पर उपस्थिति दर्ज करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपाल, शिक्षक, कृषि एवं गन्ना विभाग के कर्मचारी भी तैनात होते हैं, लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था केवल सचिवों पर ही लागू की जा रही है, जो असमान हैं । सचिवों को अक्सर अवकाश के दिनों, में आपदा प्रबंधन, चौपाल, रात्रिकालीन कार्यक्रमों, निरीक्षण, तथा आकस्मिक ऑनलाइन बैठकों में उपस्थित रहना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल आधारित उपस्थिति प्रणाली प्रभावी नहीं रह जाती। साथ ही, सचिव अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, जिनमें उनकी व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण एवं अन्य संवेदनशील डेटा होता है। थर्ड पार्टी ऐप को एक्सेस देना उल्लंघन और साइबर जोखिम को बढ़ाता है सचिव 29 से अधिक योजनाओं का संचालन करते हैं, जिनमें मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, आवास योजना, वित्त आयोग कार्य, जन्म–मृत्यु पंजीकरण आदि शामिल हैं। इसके बावजूद उन्हें वाहन भत्ता, मोबाइल भत्ता या CUG सिम जैसी सुविधाएँ नहीं मिलतीं, जबकि अनेक विभागों में यह व्यवस्था मौजूद है। शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने, पदोन्नति असमानता दूर करने, शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट अत्यंत कम है जबकि उनके अधीनस्थ कार्यरत ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत सहायक तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता भी इंटरमीडिएट ही है। अतः कार्यहित में ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग की वर्षों पुरानी शैक्षिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक करने तथा उसके अनुरूप वेतन मैट्रिक्स 05 में स्थापित करना औचित्यपूर्ण है। अतः आपसे सादर निवेदन है कि ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग की सेवा नियमावली में उपर्युक्त संशोधन कराने स्थानीय भाषा–संस्कृति अनुसार तैनाती करने, मनरेगा तथा पंचायत ऑडिट व्यवस्था में सुधार लाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।संगठन ने शासन से अनुरोध किया है कि आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए बिना ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू न की जाए तथा प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे सचिवों की कार्यकुशलता और योजनाओं की प्रभावशीलता प्रभावित न हो। इस दौरान  जयहिंद शर्मा ,आशुतोष जायसवाल ,अशोक कुमार निगम ,सर्वोत्तम विश्वकर्मा ,राजन गुप्ता, विशाल वर्मा, सत्यम चौधरी, आशुतोष कुमार मौर्य, अमरेंद्र राज यादव, सुनील कुमार गुप्ता, संतोष कुमार गुप्ता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

 

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