सिद्धार्थनगर:जिले के विकास भवन परिसर के सामने लगभग 50 वर्षों से स्थापित माँ दुर्गा मंदिर को प्रशासन द्वारा बीती रात 2 बजे अंधेरे में तोड़ा जाना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यह मंदिर न केवल श्...
सिद्धार्थनगर:
जिले के विकास भवन परिसर के सामने लगभग 50 वर्षों से स्थापित माँ दुर्गा मंदिर को प्रशासन द्वारा बीती रात 2 बजे अंधेरे में तोड़ा जाना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र था, बल्कि स्थानीय समाज की सांस्कृतिक पहचान भी था।
इस घटना से आक्रोशित नागरिकों ने भारी संख्या में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन में जनपद के सांसद जगदंबिका पाल, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद माधव, समाज के वरिष्ठजन, व्यापारी, महिला-पुरुष एवं सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे जनभावनाओं पर सीधा प्रहार बताया।
धरना स्थल पर उपस्थित सांसद जगदंबिका पाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “रात के अंधेरे में प्रशासन द्वारा मंदिर तोड़ने का निर्णय पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। मंदिर आस्था और विश्वास का प्रतीक था, जिसे ध्वस्त कर जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाई गई है। यह कदम जनता और संविधान दोनों का अपमान है। प्रशासन को इस तरह की कार्रवाई से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सरकार और जनप्रतिनिधियों की छवि को आघात पहुँचता है।”
जनपद के नागरिकों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई को संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया और कहा कि यदि कार्यवाही न्यायोचित होती तो इसे दिन के उजाले में किया जाता, न कि अंधेरे में।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने स्पष्ट किया कि जब भी गलत होगा, उसका विरोध मजबूती से किया जाएगा। जनता की आस्था और संविधान का सम्मान सर्वोपरि है।