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UGC के “Promotion of Equity Regulations 2026” के खिलाफ भारतीय सवर्ण संघ का राष्ट्रव्यापी विरोध

प्रकाशित: 29 Jan 2026

भारतीय सवर्ण संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव राधेश्याम तिवारी उर्फ पंडित साधू तिवारी ने इस नियम को “काला कानून” बताते हुए महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र भेजकर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

भारतीय सवर्ण संघ का कहना है कि भारत की सामाजिक संरचना सदियों से विविधता में एकता और समरस सह-अस्तित्व का उदाहरण रही है। लेकिन इतिहास गवाह है कि इस स्वाभाविक संतुलन को तोड़ने के प्रयास पहले औपनिवेशिक काल में और अब आधुनिक नीतिगत ढाँचों के माध्यम से किए जा रहे हैं। संगठन का आरोप है कि स्वतंत्रता के बाद भी पहचान-आधारित राजनीति और नीतियों के जरिए समाज को आर्थिक व सामाजिक रूप से विभाजित करने की प्रक्रिया जारी रही है।

संगठन के अनुसार, UGC का यह नया विनियमन समानता और न्याय जैसे शब्दों की आड़ में शैक्षणिक संस्थानों को सामाजिक प्रयोगशालाओं में बदल सकता है। भारतीय सवर्ण संघ ने इस नियम को लेकर कई गंभीर चिंताएँ सामने रखी हैं।

मुख्य आपत्तियाँ इस प्रकार हैं—

  • यह नियम सामाजिक न्याय के बजाय पहचान-आधारित स्थायी वर्गीकरण को संस्थागत स्वरूप देता है।

  • संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की एकांगी व्याख्या से रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन की आशंका उत्पन्न होती है।

  • विश्वविद्यालयों में Equity Committees और शिकायत तंत्र भय, अविश्वास और आत्म-संयम का वातावरण बना सकते हैं।

  • शिक्षा का मूल उद्देश्य—ज्ञान, शोध, नवाचार और राष्ट्र-निर्माण—हाशिये पर चला जाता है और सामाजिक पहचान केंद्र में आ जाती है।

राधेश्याम तिवारी ने स्पष्ट किया कि भारतीय सवर्ण संघ सामाजिक न्याय का विरोध नहीं करता, लेकिन उसका मार्ग संघर्ष और विभाजन नहीं बल्कि समरसता, संतुलन और संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता ने कभी भी स्थायी टकराव को समाधान नहीं माना है।

संगठन द्वारा की जा रही प्रमुख पहलें—

  1. भारतीय सवर्ण संघ ने राष्ट्रपति महोदया और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस कानून को समाप्त करने तथा एक संतुलित और पारदर्शी नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

  2. संगठन ग्राम स्तर से लेकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन कर रहा है।

  3. भारतीय सवर्ण संघ प्रत्येक शिक्षण संस्थान में समानता, न्याय और भारतीय वैदिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा है।

संगठन ने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः”, “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु” जैसे वैदिक सूत्र भारतीय समाज की आत्मा रहे हैं। इन्हीं मूल्यों के आधार पर भारतीय सवर्ण संघ इस कानून के पूर्ण रूप से वापस लिए जाने तक अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेगा।