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गोरखपुर महोत्सव में नारी स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर हुआ मंथन, बनेगा ठोस रोडमैप : महापौर, एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक और गोविवि की कुलपति ने परिचर्चा में रखे महत्वपूर्ण विचार

गोरखपुर | 13-Jan-2026 12:31 AM | 47 |
गोरखपुर
महापौर, एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक और गोविवि की कुलपति ने परिचर्चा में रखे महत्वपूर्ण विचार

गोरखपुर। जिले में चल रहे गोरखपुर महोत्सव के अंतर्गत रविवार को नारी स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को लेकर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। “स्वास्थ्य ही सम्पदा” विषय पर केंद्रित इस परिचर्चा में महिला स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ। कार्यक्रम में नगर निगम, चिकित्सा संस्थानों, विश्वविद्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।


परिचर्चा में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक (सेवानिवृत्त मेजर जनरल) डॉ. विभा दत्ता और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अभिनव मिश्र और विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ. दिव्या रानी सिंह ने परिचर्चा के सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया।


इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वस्थ समाज की कल्पना स्वस्थ नारी के बिना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है और जब परिवार की महिलाएं स्वस्थ होती हैं, तो समाज और राष्ट्र की नींव स्वतः मजबूत होती है।” महापौर ने नगर निगम द्वारा महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि समन्वित और सतत प्रयासों से ही नारी स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों, विशेषकर सर्वाइकल कैंसर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, जागरूकता और प्रारंभिक निदान से महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। डॉ. दत्ता ने बताया कि जिले में महिला स्वास्थ्य को लेकर कई विशेष पहल की जा रही हैं और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से इन प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा रहा है।


गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने नारी सशक्तिकरण को नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली भूमिका में आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास ही नारी स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को स्थायी आधार प्रदान कर सकता है।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने जिले में संचालित महिला स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मातृ स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।


परिचर्चा में डॉ. दिव्या रानी सिंह ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने जागरूकता को इस दिशा में सबसे बड़ा हथियार बताया।


कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के कई अधिकारी भी उपस्थित रहे। परिचर्चा के अंत में यह निर्णय लिया गया कि नारी स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सशक्त भूमिका मिल सके।

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