उदय बोरवणकर बने पूर्वोत्तर रेलवे के नए महाप्रबंधक : भारतीय रेल में 35 वर्षों का अनुभव, ‘कवच’ व वंदे भारत जैसे अभियानों में निभाई अग्रणी भूमिका
गोरखपुर। उदय बोरवणकर ने शनिवार को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक का पदभार ग्रहण किया। भारतीय रेल प्रबंधन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी बोरवणकर 1985 में स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिस के रूप में चयनित हुए थे।
उन्होंने भारतीय रेल यांत्रिक इंजीनियरिंग संस्थान, जमालपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके साथ ही मुंबई से एमबीए की उपाधि प्राप्त की। उच्च स्तरीय प्रबंधन व तकनीकी प्रशिक्षण उन्होंने आईआईटी खड़गपुर, आईएसबी हैदराबाद, बोक्कोनो स्कूल ऑफ बिजनेस (मिलान) और ऑस्ट्रिया के ग्राज विश्वविद्यालय से हासिल किया।
35 वर्षों का समृद्ध अनुभव
उदय बोरवणकर ने अपने 35 वर्षों के लंबे करियर में मध्य, पश्चिम, दक्षिण-पूर्व मध्य और पश्चिम मध्य रेलवे, रेलवे बोर्ड, खान मंत्रालय और महा मेट्रो में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे नागपुर में अपर मंडल रेल प्रबंधक, भोपाल में मंडल रेल प्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य एवं पश्चिम रेलवे में प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर तथा आरडीएसओ के महानिदेशक जैसे अहम दायित्व निभा चुके हैं।
नवाचार और आधुनिक तकनीक में योगदान
आरडीएसओ के महानिदेशक रहते हुए उन्होंने भारतीय रेल को आधुनिक बनाने के कई अभियानों का नेतृत्व किया। उनके मार्गदर्शन में ‘कवच’, वंदे भारत ट्रेन, हाइड्रोजन ट्रेन, एआई व ड्रोन आधारित तकनीक और डीएएस जैसी योजनाओं को बढ़ावा मिला। इन पहलों ने रेलवे के तकनीकी ढांचे को नई दिशा दी।
व्यक्तिगत रुचियां और योगदान
एक कुशल वक्ता और अच्छे पाठक के रूप में प्रसिद्ध श्री बोरवणकर को जैविक खेती, फोटोग्राफी और भारतीय संगीत से विशेष लगाव है। इसके साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण व हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में लगातार सक्रिय रहे हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे परिवार ने उनके नेतृत्व में रेलवे के यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और तकनीकी रूप से उन्नत सेवाएं देने की उम्मीद जताई है।