देव उठानी एकादशी पर दशा रानी मंदिर में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब
देव उठानी एकादशी पर दशा रानी मंदिर में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब
अजीत प्रताप यादव (9369114113)
रायबरेली जनपद के भोजपुर स्थित सुप्रसिद्ध दशा रानी मंदिर में इस वर्ष देव उठानी एकादशी के पावन अवसर पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह प्रातःकाल से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर परिसर पहुंचने लगे। सूर्योदय से पहले ही मंदिर के मुख्य द्वार पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु हाथों में पूजा की थाली, फूल-माला, दीपक और प्रसाद लेकर “जय माता दशा रानी” के जयकारों के साथ दर्शन के लिए आतुर नजर आए। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में गूंज उठा।
देव उठानी एकादशी को भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने का दिन माना जाता है। इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत भी की जाती है। इसी दिन दशा रानी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान विष्णु और माता दशा रानी की आरती संपन्न कराई। भक्तों ने दीपदान किया और जलाभिषेक के साथ अपनी मनोकामनाएं मांगीं।
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का ‘लड्डू प्रसाद’ है। मान्यता है कि जो भी भक्त मन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ दशा रानी मंदिर में लड्डू ग्रहण करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। जब उसकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वह पुनः मंदिर आकर देवी मां को धन्यवाद ज्ञापित करता है और प्रसादस्वरूप लड्डू का भोग लगाकर भक्तों में वितरण करता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
इस अवसर पर आसपास के गांवों से लेकर दूर-दराज़ के जिलों तक से श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर समिति ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस बल तैनात रहा, वहीं स्वयंसेवकों ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जिससे इसका दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई दे रहा था।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आए। भक्तों ने न केवल देवी-दर्शन का लाभ उठाया बल्कि भजन-कीर्तन, कथा और सत्संग में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वातावरण में भक्ति और आस्था की ऐसी छटा बिखरी थी कि हर कोई स्वयं को दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण महसूस कर रहा था।
भोजपुर का दशा रानी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कार का प्रतीक बन चुका है। देव उठानी एकादशी जैसे पर्व पर यहां उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा जब सच्ची होती है, तो कोई भी मनोकामना अधूरी नहीं रहती।