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सरेनी सीएचसी में आशा वर्कर्स का धरना प्रदर्शन जारी

प्रकाशित: 22 Jan 2026

सरेनी सीएचसी में आशा वर्कर्स का धरना प्रदर्शन जारी, मानदेय बढ़ोतरी और बकाया भुगतान की मांग तेज

अजीत यादव पत्रकार रायबरेली 9369114113

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले रायबरेली जनपद के सरेनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आशा वर्कर्स का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। आशा बहनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बैठकर सरकार और संबंधित विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान आशाओं ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार अधिक कार्य लिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुपात में उन्हें न तो समय पर भुगतान मिल रहा है और न ही उचित मानदेय दिया जा रहा है।

धरना दे रही आशा वर्कर्स का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें आयुष्मान भारत योजना, आभा कार्ड (ABHA Card) बनवाने, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, सर्वेक्षण और अन्य स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाते हैं। आशा बहनों का दावा है कि वे सभी कार्य पूरी ईमानदारी और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करती हैं, इसके बावजूद उन्हें महीनों तक किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।

आशाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी मानदेय और प्रोत्साहन राशि आती है, उसे संबंधित अधिकारी गमन कर लेते हैं। कई बार भुगतान की जानकारी मांगने पर उन्हें टालमटोल जवाब दिया जाता है। इस स्थिति से आशा वर्कर्स आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। धरना स्थल पर मौजूद आशा बहनों ने बताया कि वे बेहद कम मानदेय में काम कर रही हैं, जिससे परिवार का पालन-पोषण करना कठिन होता जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने जमकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। आशा बहनों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से सीधे गुहार लगाते हुए मांग की कि उनका मासिक मानदेय वर्तमान 2000 रुपये से बढ़ाया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। साथ ही, बकाया भुगतान को जल्द से जल्द जारी करने और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई।

धरने पर बैठी आशाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आशा वर्कर्स यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई आश्वासन नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि आशा वर्कर्स स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में इनकी अहम भूमिका है। इसके बावजूद यदि उन्हें समय पर भुगतान और उचित मानदेय नहीं मिलेगा, तो स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होंगी।

फिलहाल, सरेनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशाओं का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर आशा बहनों को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि आशा वर्कर्स की मांगों पर कब और क्या निर्णय लिया जाता है।