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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

प्रकाशित: 06 Jan 2026

सीकर. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा निदेशालय महिला अधिकारिता विभाग के निर्देशानुसार उपनिदेशक महिला अधिकारिता विभाग सीकर राजेन्द्र चौधरी के निर्देशन में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 100 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बाल विकास परियोजना कार्यालय धोद में किया गया, जिसमें बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया गया।

 

कार्यक्रम में पर्यवेक्षक सुनीता चौधरी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो जाता है। बाल विवाह से उत्पन्न सामाजिक व पारिवारिक समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

 

इस अवसर पर जेंडर स्पेशलिस्ट प्रकाश चन्द्र ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आमजन की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, जेंडर संवेदीकरण तथा बालिकाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी जानकारियां साझा कीं।

 

कार्यक्रम में ब्लॉक की समस्त ग्राम साथिनें उपस्थित रहीं, जिन्होंने बाल विवाह रोकथाम के लिए गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। इसी क्रम में ग्राम पंचायत भवन नेछवा में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां पर्यवेक्षक मोनिका कुमारी ने बाल विवाह रोकथाम पर जानकारी दी, जबकि जेंडर स्पेशलिस्ट प्रकाश चन्द्र ने सजग लाडो अभियान के प्रभावी संचालन पर प्रकाश डालते हुए बालिकाओं के अधिकारों के संरक्षण का संदेश दिया।