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पराक्रम दिवस एवं ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण

प्रकाशित: 24 Jan 2026

सीकर. राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस के उपलक्ष्य में सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, सीकर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए युवाओं को राष्ट्रभक्ति और पराक्रम की प्रेरणा देना रहा।

 

कार्यक्रम में इतिहासकार महावीर पुरोहित, जिला साक्षरता अधिकारी डॉ. सी. पी. महर्षि, सहायक निदेशक पूरणमल, जिला समन्वयक राकेश कुमार लाटा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी राकेश कुमार ढाका, पूर्व प्राचार्य पवन शर्मा सहित जिले के साहित्यकारों, पत्रकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता निभाई।

 

संगोष्ठी में वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वर्तमान महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्र की एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। इतिहासकार महावीर पुरोहित ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. सी. पी. महर्षि ने नेताजी को युवाओं के लिए आदर्श बताते हुए उनके साहस और नेतृत्व क्षमता को प्रेरणास्रोत बताया।

 

सहायक निदेशक पूरणमल एवं जिला समन्वयक राकेश कुमार लाटा ने ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखे। अन्य वक्ताओं ने भी नेताजी के त्याग, संघर्ष और देशप्रेम को स्मरण करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम राष्ट्रगान एवं देशभक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ।