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माताओं ने किया महालक्ष्मी पूजन,पुत्र की आयु और आरोग्य की कामना : सोलह गांठ का गढ़ा, सोलह दीपक, सोलह श्रृंगार, सोलह बार तर्पण और सोलह बार कथा वाचन का विधान है

बांदा | 15-Sep-2025 08:42 AM | 65 |
बांदा
सोलह गांठ का गढ़ा, सोलह दीपक, सोलह श्रृंगार, सोलह बार तर्पण और सोलह बार कथा वाचन का विधान है

बांदा। आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर रविवार को घर-घर में श्रद्धा और आस्था के साथ महालक्ष्मी पूजन किया गया। इस दिन माताओं ने पुत्रों की लंबी आयु, आरोग्य लाभ और परिवार के सर्वकल्याण की कामना से व्रत रखकर विधि-विधान से मां लक्ष्मी जी की आराधना की।

रीना सिंह ने बताया कि परंपरा के अनुसार महिलाएं प्रातःकाल जलाशय में जाकर दूर्वा से सोलह बार तर्पण करती हैं और पार्थिव हाथी के साथ महालक्ष्मी का पूजन करती हैं। इस व्रत में ‘सोलह’ का विशेष महत्व माना जाता है—सोलह गांठ का गढ़ा, सोलह दीपक, सोलह श्रृंगार, सोलह बार तर्पण और सोलह बार कथा वाचन का विधान है। महिलाएं गहनों और अलंकारों से मां लक्ष्मी का श्रृंगार कर धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्पमाला अर्पित करती हैं।

पंडित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष महालक्ष्मी पूजन रवि सिद्धि योग एवं वृष राशि के चंद्रमा में संपन्न हुआ। अष्टमी तिथि रविवार सुबह से प्रारंभ होकर रात्रि 3:06 बजे तक रही। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए पूजा इसी समय संपन्न की गई।

 

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