राज्यभर के लेखपालों का कार्य बहिष्कार जारी, तहसीलों में रुके राजस्व कार्यउत्तर प्रदेश में लेखपालों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। 1 नवंबर 2025 से लेखपाल संघ द्वारा शुरू किया...
राज्यभर के लेखपालों का कार्य बहिष्कार जारी, तहसीलों में रुके राजस्व कार्य
उत्तर प्रदेश में लेखपालों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। 1 नवंबर 2025 से लेखपाल संघ द्वारा शुरू किया गया पूर्ण कार्य बहिष्कार आज भी जारी है, जिसके चलते प्रदेश की सभी तहसीलों में राजस्व कार्य ठप हो गए हैं। खतौनी, नामांतरण, सीमांकन, मुआवजा, कृषि सर्वे और सामाजिक योजनाओं के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
लेखपाल संघ ने बताया कि पिछले 9 वर्षों से वेतनमान उन्नयन, एसीपी/एमएसीपी विसंगतियों का समाधान, जोखिम भत्ता, सीमांकन भत्ता, यात्रा भत्ता वृद्धि, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने और पटवार स्कूल पुनः शुरू किए जाने जैसी मांगें लंबित हैं। कई बार शासन से वार्ता होने के बावजूद ठोस निर्णय न होने से कर्मचारी नाराज हैं।
संघ ने 5 अक्टूबर 2025 को हुई प्राथमिक बैठक में चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। 13 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक प्रतीकात्मक प्रदर्शन के बाद संघ ने 1 नवंबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।
संघ की प्रमुख मांगें
प्रारंभिक वेतनमान 2800 ग्रेड पे से बढ़ाकर 4200 ग्रेड पे किया जाए
पदोन्नति में 1:4 अनुपात समाप्त करके लेखपालों को सीधी प्रगति के अवसर मिले
जोखिम भत्ता, सीमांकन भत्ता और यात्रा भत्ता बढ़ाया जाए
तकनीकी प्रशिक्षण और पटवार स्कूलों को पुनर्स्थापित किया जाए
लेखपाल संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन भेजा जा चुका है, लेकिन समाधान न होने पर अब आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संघ ने साफ कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।