स्याना में पंचायत सचिवों ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में शुरू किया सांकेतिक सत्याग्रहस्याना। सोमवार को पंचायत सचिवों ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में सांकेतिक सत्याग्रह शुरू कर दिया। यह...
स्याना में पंचायत सचिवों ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में शुरू किया सांकेतिक सत्याग्रह
स्याना। सोमवार को पंचायत सचिवों ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में सांकेतिक सत्याग्रह शुरू कर दिया। यह आंदोलन मुख्य विकास अधिकारी के बुलंदशहर स्तरीय आह्वान के बाद शुरू हुआ है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था अव्यवहारिक है और यह सचिवों के दैनिक सरकारी कार्यों में बाधा डाल रही है।
पंचायत सचिवों ने बताया कि शासनादेश के तहत उनकी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रणाली व्यवहारिक नहीं है। उनका कहना है कि नेटवर्क की समस्या और कार्यक्षेत्र की व्यापकता के कारण ऑनलाइन उपस्थिति से सरकारी कामकाज प्रभावित होगा।
सचिवों ने मांग की है कि सरकार इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करे और जमीनी हकीकत के अनुरूप समाधान निकाले। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।पंचायत सचिवों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। संगठन ने साफ कहा है कि जब तक ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था सहित अन्य मुद्दों पर सफल वार्ता या ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका सत्याग्रह कार्यक्रम जारी रहेगा।
संगठन के आह्वान पर जिले के सभी विकास खंडों में पंचायत सचिवों ने काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध शुरू कर दिया है। सचिव अपने नियमित शासकीय कार्यों का निष्पादन तो करेंगे, लेकिन विरोध दर्ज कराते हुए काली पट्टी पहने रहेंगे।
विकास खंड मुख्यालयों पर संगठन के बैनर तले सचिव फर्श पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से सांकेतिक सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती, यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
सचिवों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि में उन पर थोपे जा रहे अन्य विभागों के अतिरिक्त कार्यों का भी विरोध किया जाएगा। संगठन का कहना है कि सचिवों पर अनावश्यक बोझ बढ़ाया जा रहा है, जो उनके मूल कार्यों को प्रभावित करता है।
पंचायत सचिवों का यह शांतिपूर्ण आंदोलन प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत कब होगी और समाधान कब निकलता है।