खगड़िया। संविधान बचाओ, न्याय बचाओ, सम्मान बचाओ, अधिकार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ, नारी मांगे न्याय - अब ना सहेंगे अन्याय, नारों के साथ विधि जागरुकता दिवस पर कानूनी सलाह शिविर का आयोजन किया गया जिस...
खगड़िया। संविधान बचाओ, न्याय बचाओ, सम्मान बचाओ, अधिकार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ, नारी मांगे न्याय - अब ना सहेंगे अन्याय, नारों के साथ विधि जागरुकता दिवस पर कानूनी सलाह शिविर का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष सह प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। संचालन पारुल कुमारी ने की।
कानूनी जागरुकता कार्यक्रम में भरण पोषण संबंधी फैमिली कोर्ट में चल रहे लंबे दिनों से लंबित मुकदमे का त्वरित कार्रवाई एवं न्याय देने पर कानूनी जानकारी दी गई। तथा महिला अधिकार न्याय आत्मनिर्भर सम्मान सुविधा सुरक्षा शिक्षा आदि मुद्दे पर विस्तृत गंभीर चर्चा की गई।
श्री यादव ने कहा कि महिलाओं से संबंधित फैमिली कोर्ट एवं महिला थाना में मुकदमे का अंबार लगी हुई है। कोर्ट का चक्कर काटते चप्पल घिस जा रही है। लंबी कानूनी प्रक्रिया एवं लेट लतीफ न्याय से महिलाएं परेशान, असहज, असुरक्षित महसूस कर रही है। हताश निराश होकर भटकाव व दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को विवश है। बाबजूद न्याय नहीं मिलने के कारण महिलाएं व बच्चे का जिंदगी बर्बाद हो रही है। सरकार महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सम्मान सुरक्षा सुविधा स्वावलंबन का सिर्फ झूठा नारा देने में मशगूल है। महिलाओं की हालात देखनी हो तो महिला थाना एवं फैमिली कोर्ट की नजारा देखें, जहां महिलाएं आर्थिक मानसिक शारीरिक रूप से शोषण का शिकार हो रहे हैं। आखिर कब तक महिलाओं को न्याय मिलेगी ? कब इनका जीवन सुखमय होगा ? कबतक कोर्ट पर मुकदमे का बोझ कमेगा ? सरकार एवं न्यायालय को जवाब दे।
श्री यादव ने कहा कि कुछेक जज द्वारा कहना कि मेरा मन, मेरा कोर्ट , मेरा न्याय, हमें जो मन होगा सो करेंगे। इतना अच्छे-अच्छे सुंदर कपड़े पहनकर आते हैं इन्हें भरण पोषण लेने की क्या जरूरत है। पीड़ित महिलाएं कुछ जवाब देती है बोलना चाहती है तो धक्के मारकर कोर्ट एवं परिसर से पुलिस से द्वारा निकाल बाहर किया जाता है और पिटाई के साथ मुकदमा कर जेल में बंद करने की धमकी दी जाती है। उक्त कथन व धमकी डॉक्टर अंबेडकर के सपना पर कुठाराघात है तथा संविधान का उल्लंघन है। न्यायालय में व्याप्त भ्रष्टाचार चीख चीखकर न्याय का गुहार लगा रही है। उक्त परिस्थिति में परिवार एवं पति द्वारा प्रताड़ित महिलाएं आखिर कहां जाएं ? बहुत महिलाएं ने इस जिंदगी से आत्महत्या को बेहतर बतायी।
शबनम अर्चना नीतू गुड़िया डॉली हेमा फूलन तितली ममता सुधा आदि दर्जनों महिलाओं ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में कोर्ट जज द्वारा भी न्याय देने में सौतेलापन व्यवहार किया जाता है। महिलाओं ने वो होकर अपनी व्यथा सुनाई। कही कि आखिर कब तक मैके में मां पर बोझ बनें, ननद भाभी का ताना सुने। पांच बरस से लेकर 25 वर्षों तक फैमिली कोर्ट में मामला चल रही है तारीख मिलने के अलावे न्याय अब तक नहीं मिली। महिलाओं ने कहा कि नारी मांगें न्याय , अब ना सहेंगे अन्याय। गहरी सांस लेते हुए दृढ़ता पूर्वक कही कि अब परिवार , सड़क से लेकर सदन तक, परिवार - कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट - राष्ट्रपति तक संघर्ष तेज करेंगे।
देश बचाओ अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष किरण देव यादव, राष्ट्रीय सचिव धर्मेंद्र कुमार, अमित कुमार, ममता कुमारी, चंपा राय, तितली भारती, सुधा साहा आदि ने कहा कि महिलाओं को हक हकूक अधिकार नियम सम्मान को लेकर हर संभव सहयोग संघर्ष तेज किया जाएगा।
बैठक में महिलाओं ने संविधान लोकतंत्र जिंदाबाद, डॉक्टर अंबेडकर जिंदाबाद, दम है कितना दमन में तेरे - देखा है जी देखेंगे, कितनी लंबी जेल तुम्हारी - देखा है जी देखेंगे, जब तक जेल में चना रहेगा - आना-जाना लगा रहेगा, लड़ेंगे जीतेंगे, नहीं डरेंगे नहीं झुकेंगे - अपना अधिकार लेके रहेंगे, लड़े हैं जीते हैं, नारों को बुलंद किया।
सब ने एक स्वर में पीड़ित महिलाओं से अधिक संख्या में नारी मांगें न्याय, ग्रुप संगठन से जुड़ने का अपील किया।