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Today sirohi-hindi-News : सिरोही। पिण्डवाड़ा में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने किया सेवा शिविर का बहिष्कार

सिरोही | 01-Nov-2025 09:09 AM | 317 |
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सिरोही। पिण्डवाड़ा में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने किया सेवा शिविर का बहिष्कार

सिरोही : पिण्डवाड़ा में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने किया सेवा शिविर का बहिष्कार

नायब तहसीलदार ने समझाइश की, पर नहीं माने ग्रामीण-राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

पिण्डवाड़ा क्षेत्र में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा 800 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। भारजा के बाद अब रोहिड़ा गांव में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का भी ग्रामीणों ने बहिष्कार कर दिया।

जानकारी के अनुसार, मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा रोहिड़ा, वाटेरा, भीमाना और भारजा गांवों की करीब 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना का ग्रामीणों द्वारा पिछले डेढ़ महीने से जोरदार विरोध किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन शुरू होने से क्षेत्र में कृषि, जलस्रोत और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी कारण उन्होंने शासन द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में भाग नहीं लिया और शांतिपूर्ण तरीके से सरकारी कार्यक्रम का बहिष्कार किया।

गांव के प्रमुख लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक परियोजना को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी सरकारी आयोजन में भाग नहीं लेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो विरोध आंदोलन और तेज किया जाएगा।

नायब तहसीलदार ने की समझाइश, नहीं माने ग्रामीण

धरना स्थल पर पहुंचे भावरी नायब तहसीलदार नैनाराम ने ग्रामीणों से समझाइश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल निरस्त करना ही होगा।

ग्रामीणों ने राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और क्षेत्र में प्रस्तावित खनन को तत्काल रद्द करने की मांग रखी। इस दौरान रोहिड़ा ग्राम पंचायत के प्रशासक पवन कुमार घांची, संघर्ष समिति के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों की चेतावनी -नहीं मानी मांग तो होगा उग्र आंदोलन

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया कि यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया और खनन परियोजना को निरस्त नहीं किया गया, तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन और सरकार की होगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि सिरोही प्रशासन की उदासीनता के कारण यह विवाद बढ़ता जा रहा है। आंदोलन को डेढ़ माह से अधिक समय हो गया है, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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