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शीघ्र प्रकाशित होगी आशुतोष मिश्र की पुस्तक “कराहती धरती, बेचैन मनुष्य” : पर्यावरण और युवा चेतना पर केंद्रित वैचारिक कृति

गोरखपुर | 16-May-2026 07:49 PM | 47 |
गोरखपुर
पर्यावरण और युवा चेतना पर केंद्रित वैचारिक कृति

गोरखपुर। लेखक एवं पत्रकार आशुतोष मिश्रा की बहुप्रतीक्षित पुस्तक “कराहती धरती, बेचैन मनुष्य” शीघ्र ही पाठकों के बीच आने वाली है। लगभग ढाई सौ पृष्ठों की यह पुस्तक पर्यावरणीय संकट, सामाजिक संवेदनाओं, युवाओं की दिशा, रोजगार की चुनौतियों और बदलते भारतीय समाज की स्थितियों को केंद्र में रखकर लिखी गई है। यह केवल पर्यावरण विषयक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज, मनुष्य और युवा चेतना से संवाद करती एक गंभीर वैचारिक कृति मानी जा रही है।
लेखक आशुतोष मिश्र ने बताया कि तेजी से बदलते सामाजिक और पर्यावरणीय परिदृश्य ने उन्हें इस पुस्तक को लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब विकास के नाम पर धरती का संतुलन बिगड़ने लगे, नदियां प्रदूषण से कराहने लगें, जंगल सिमटने लगें और समाज की संवेदनाएं भीड़ के शोर में दब जाएं, तब एक संवेदनशील लेखक का मौन रहना संभव नहीं होता। इसी चिंता और आत्ममंथन से इस पुस्तक का जन्म हुआ है।
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह ने कहा कि “कराहती धरती, बेचैन मनुष्य” केवल पर्यावरणीय संकट की चर्चा करने वाली पुस्तक नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की आंतरिक बेचैनी, सामाजिक ताने-बाने, बेरोजगारी और नौजवानों की दिशा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी गंभीरता से उठाती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक समस्याओं का वर्णन भर नहीं करती, बल्कि समाधान की राह भी सुझाती है।
आनंद सिंह ने बताया कि पुस्तक में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारण, आत्मनिर्माण और रोजगार के अवसरों की दिशा में प्रेरित करने वाले विचार भी शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उन युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, जिन्हें अपने जीवन की दिशा और उद्देश्य को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक हिंदी पत्रकारिता से जुड़े रहने वाले आशुतोष मिश्र ने समाज और जीवन को बेहद करीब से देखा है। एक केमिकल इंजीनियर और संवेदनशील लेखक होने के नाते उन्होंने अपने अनुभवों, सामाजिक बदलावों और मानवीय पीड़ाओं को गंभीरता से महसूस किया और उन्हें शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह के अनुसार यह पुस्तक पाठकों को केवल चिंतित नहीं करती, बल्कि उन्हें सकारात्मक सोच और समाधान की ओर प्रेरित भी करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं और जागरूक पाठकों के लिए उपयोगी साबित होगी।
लेखकआशुतोष मिश्रा  ने अपनी पहली साहित्यिक कृति के लिए पाठकों, मित्रों और शुभचिंतकों से स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन की अपेक्षा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने, आत्ममंथन करने और जीवन को नई दृष्टि से देखने के उद्देश्य से लिखी गई है।

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