महाकुंभ 2025 के दौरान जहां श्रद्धालु गंगा, यमुना और त्रिवेणी में स्नान कर रहे हैं, वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा जल की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ...
महाकुंभ 2025 के दौरान जहां श्रद्धालु गंगा, यमुना और त्रिवेणी में स्नान कर रहे हैं, वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा जल की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने 16 फरवरी 2025 को कहा कि 50 करोड़ लोगों को सीवेज से दूषित पानी में नहलाया गया, जो स्नान योग्य भी नहीं था।
नदी में सीधा गिर रहा सीवेज, यूपीपीसीबी पर उठे सवाल
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के आधार पर यूपीपीसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि यूपीपीसीबी ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि गंगा और यमुना में सीधे सीवेज का पानी गिर रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है।
सीपीसीबी की रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
3 फरवरी 2025 को दाखिल सीपीसीबी की रिपोर्ट में बताया गया कि 12-13 जनवरी 2025 के दौरान हुई निगरानी में अधिकांश स्थानों पर नदी का जल मानकों के अनुरूप नहीं था।
🔹 सात स्थानों पर जल नमूनों की जांच में गंगा और यमुना का पानी अत्यधिक प्रदूषित पाया गया।
🔹 12 जनवरी से 4 फरवरी 2025 तक संगम, शृंगवेरपुर घाट, लॉर्ड कर्जन पुल, शास्त्री पुल, नागवासुकी मंदिर पंटून पुल, डीहा घाट, पुराना नैनी पुल और संगम से पहले यमुना का जल स्नान योग्य नहीं पाया गया।
🔹 लॉर्ड कर्जन ब्रिज पर बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) सामान्य मानक 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक थी, जो यह दर्शाता है कि पानी में जैविक प्रदूषण अत्यधिक है।
फीकल कोलीफॉर्म की अधिकता से जलजनित बीमारियों का खतरा
सीपीसीबी रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि गंगा जल में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा अधिक थी, जो कि मानव और पशुओं के मल से संबंधित बैक्टीरिया हैं। इनकी अधिकता से टाइफाइड, डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
एसटीपी की विफलता: सीवेज सीधे गंगा में
एनजीटी में सीपीसीबी के वकील ने बताया कि प्रयागराज के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अपनी क्षमता से कई गुना अधिक सीवेज प्राप्त कर रहे हैं, जिससे वे प्रभावी उपचार नहीं कर पा रहे हैं।
🔹 53 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) बिना उपचार का सीवेज गंगा में गिर रहा है।
🔹 कई स्थानों पर टैप किए गए नाले भी सीधे गंगा में मिल रहे हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
🔹 प्रयागराज के पोंगघाट एसटीपी संगम से पहले गंगा से जुड़ा है, लेकिन यह मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है।
एनजीटी की सख्ती, यूपीपीसीबी से मांगी रिपोर्ट
एनजीटी ने यूपीपीसीबी से जवाब तलब करते हुए पूछा कि 2019 में तय किए गए सख्त मानकों को एसटीपी पर लागू क्यों नहीं किया गया? हालांकि, यूपीपीसीबी इसका संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया।
बहरहाल, एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई तक यूपीपीसीबी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और नदी की सफाई के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।