फतेहपुर/सीकर. कस्बे के प्रख्यात सिने निर्देशक राधेश्याम पीपलवा की फिल्म पुतूल को 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में सम्मानित किया गया है। इस वर्ष विश्वभर से केवल पाँच श्रेष्ठ फिल्मों...
फतेहपुर/सीकर. कस्बे के प्रख्यात सिने निर्देशक राधेश्याम पीपलवा की फिल्म पुतूल को 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में सम्मानित किया गया है। इस वर्ष विश्वभर से केवल पाँच श्रेष्ठ फिल्मों का चयन किया गया, जिनमें पीपलवा द्वारा निर्देशित पुतूल भी शामिल रही। अन्य चयनित फिल्मों में मिस्र की अरबी फिल्म जन्मदिन मुबारक हो, भारत की तमिल फिल्म कदल अन्नी, कोरिया की द बीटल प्रोजेक्ट और फ्रांस-रोमानी-अल्बानियाई भाषा की फिल्म द ओडिसी ऑफ जॉय शामिल हैं।
राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (भारत सरकार) तथा गोवा सरकार की एंटरटेनमेंट सोसायटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव 20 से 28 नवंबर तक गोवा में हुआ। उद्घाटन व समापन समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, अभिनेता रणवीर सिंह, सुपरस्टार रजनीकांत सहित फिल्म जगत की कई हस्तियाँ मौजूद रहीं। समारोह में रजनीकांत को फ़िल्मी करियर के 50 वर्ष पूरे करने पर विशेष सम्मान भी दिया गया।
राधेश्याम पीपलवा राष्ट्रीय पुरस्कार ज्यूरी के सदस्य रह चुके हैं और राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किए जा चुके हैं। वे कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानित फिल्मों के निर्देशक हैं। महानायक अमिताभ बच्चन भी उनके निर्देशन में एक कमर्शियल एड फिल्म में काम कर चुके हैं। पुतूल के अलावा उन्होंने ये कैसी लाइफ, नाचोम ला कुम्पुसर, चिड़ी बल्ला और दो पत्ती जैसी फिल्मों का भी निर्देशन किया है।
पुतूल एक सात वर्षीय बच्ची की भावनात्मक यात्रा पर आधारित फिल्म है। इसका निर्देशन पीपलवा ने किया है, जबकि स्क्रीनप्ले व संवाद राधेश्याम पीपलवा और ईशान वाजपेयी द्वारा लिखे गए हैं। फिल्म में वेदा अग्रवाल, अहाना कुमारा, रजत कपूर, पूरब कोहली और मानवी गागरो ने अभिनय किया है।
निर्देशक पीपलवा ने बताया कि पुतूल एक बच्ची की कहानी है जो अपने माता-पिता के तलाक के बीच भावनात्मक उथल-पुथल में फँस जाती है। वह अपने दोस्तों “डैमेज्ड गैंग” और प्यारे नाना से सहारा ढूँढ़ती है, लेकिन उसके अचानक गायब होने पर माता-पिता को अपनी टूटती भावनाओं का सामना करना पड़ता है। फिल्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके मौन संघर्ष और सुरक्षित बचपन की आवश्यकता को गहराई से उजागर करती है।