दांतारामगढ़/सीकर. दांतारामगढ़ उपखंड के रूपगढ़ गांव में भाईचारे और मानवता की ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सीरावता परिवार के बड़े भाई जगदीश प्रसाद सीरावता ने...
दांतारामगढ़/सीकर. दांतारामगढ़ उपखंड के रूपगढ़ गांव में भाईचारे और मानवता की ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सीरावता परिवार के बड़े भाई जगदीश प्रसाद सीरावता ने अपने छोटे भाई सीताराम के लिए वह कदम उठाया, जिसे साहस, प्रेम और त्याग का सर्वोच्च प्रतीक कहा जा रहा है। लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे सीताराम को जब डॉक्टरों ने प्रत्यारोपण का सुझाव दिया, तो बड़े भाई ने बिना किसी झिझक अपनी किडनी दान करने का निर्णय ले लिया।
जानकारी के अनुसार, सीताराम की दोनों किडनियां खराब होने के कारण उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी। परिवार चिंतित था, लेकिन प्रत्यारोपण के अलावा कोई विकल्प नहीं था। तभी जगदीश प्रसाद आगे आए और मेडिकल जांच में मैच मिलने के बाद तुरंत ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे सीताराम को नई जिंदगी मिल गई।
गांव में इस घटना की खूब सराहना हो रही है। आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ती दिखाई देती हैं, ऐसे में सीरावता परिवार का यह त्याग और प्रेम समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। ग्रामीणों ने जगदीश प्रसाद को वास्तविक नायक बताते हुए कहा कि उनका यह निर्णय न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए आशा और विश्वास को मजबूत करता है।
परिवारजनों और ग्रामीणों ने ईश्वर का आभार व्यक्त किया है और दोनों भाइयों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। यह घटना दर्शाती है कि प्रेम, समर्पण और भाईचारा आज भी मानवता की सबसे बड़ी ताकत है।