सीकर. पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में छठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रेरणा स्थल, पंडित दीनदयाल उप...
सीकर. पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में छठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रेरणा स्थल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय अनुसंधान केंद्र तथा हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन भारत में नालंदा और तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालय थे, जहां विश्वभर से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने मन में यह भावना रखें कि “भारत का स्वर्णिम अवसर हमारा विश्वविद्यालय लाएगा और नालंदा-तक्षशिला का गौरवशाली इतिहास पुनः लौटेगा।”
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके जरिए देश में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन संभव है तथा गरीबी को दूर किया जा सकता है। राज्यपाल ने राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले हीरालाल शास्त्री, स्वामी केशवानंद और सावित्री भाटी जैसे महान व्यक्तित्वों को याद करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने प्रदेश में शिक्षा को नई दिशा दी।
राज्यपाल बागड़े ने कहा कि राजस्थान वीरों और वीरांगनाओं की भूमि है और शेखावाटी क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां से जुड़े बजाज, बिरला, अग्रवाल और मोदी जैसे औद्योगिक घरानों ने उद्योग और व्यापार जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को स्मरण करते हुए कहा कि वे केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक महान चिंतक और संस्था के समान थे। उनके द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद राष्ट्र को दी गई अनूठी विचारधारा है, जिसका मूल सिद्धांत है कि व्यक्ति से बड़ा समाज होता है।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा का उपयोग समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए करने का आह्वान किया।
समारोह में कुल 40 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। साथ ही कला संकाय के 34,846, विज्ञान संकाय के 15,743, वाणिज्य संकाय के 3,362, समाज विज्ञान संकाय के 12,457, शिक्षा संकाय के 24,232 और विधि संकाय के 38 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के रामचन्द्र नीलकंठ भोगले, पश्चिम बंगाल के डॉ. धनपत राम अग्रवाल तथा झुंझुनूं के मुकंदगढ़ निवासी शैलेंद्रनाथ अघोरी बाबा को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य डॉ. अनिल कुमार राय, पद्मश्री प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत, जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नुनावत, रजिस्ट्रार श्वेता यादव सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।